उर्दू को फ़रोग़ देने टेक्नालोजी का ज़्यादा इस्तेमाल ज़रूरी

उर्दू को फ़रोग़ देने टेक्नालोजी का ज़्यादा इस्तेमाल ज़रूरी
नायब सदर जमहूरीया हामिद अंसारी ने आज कहा कि अवाम में उर्दू को ज़्यादा से ज़्यादा मक़बूल बनाने के लिए टेक्नालोजी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहीए।

नायब सदर जमहूरीया हामिद अंसारी ने आज कहा कि अवाम में उर्दू को ज़्यादा से ज़्यादा मक़बूल बनाने के लिए टेक्नालोजी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहीए।

उन्होंने कहा कि खासतौर पर स्कूलस में उर्दू को आम करने टेक्नालोजी से मदद हासिल की जा सकती है। हामिद अंसारी दिल्ली में उर्दू हफ़तावार नई दुनिया की तरफ से मुनाक़िदा एक तक़रीब से ख़िताब कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि फिल्मों ने उर्दू ज़बान के फ़रोग़ में एक अहम रोल अदा किया है और उर्दू ज़बान को नई नसल में मुंतक़िल करने और इन में मक़बूल बनाने के लिए टेक्नालोजी भी अहम रोल निभा सकती है और टेक्नालोजी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहीए।

उन्होंने कहा कि एसे स्कूलस में जहां उर्दू सिखाई नहीं जा रही है उर्दू को आम करने टेक्नालोजी का इस्तेमाल मुआविन साबित होसकता है।

उन्होंने कहा कि उमुमान ये शिकायत होती हैके नई नसल उर्दू से नावाक़िफ़ होती जा रही है। इस शिकायत का अज़ाला करने के लिए भी उर्दू को टेक्नालोजी से मरबूत करना ज़रूरी है ताकि हमारी नई नसल को उर्दू ज़बान से वाक़िफ़ करवाया जा सके।

नायब सदर जमहूरीया ने कहा कि उर्दू सहाफ़त का सहाफ़ती शोबे में एक ख़ुसूसी मुक़ाम है। उर्दू सहाफ़त का तर्ज़ उमूमी तौर पर और ज़्यादा तर इन्क़िलाबी होता है।

हामिद अंसारी ने कहा कि उर्दू सहाफ़त ने तक़रीबन हर दौर में अपने इन्क़िलाबी तर्ज़ को साबित करदिया है। इस ने कई इन्क़िलाबों को ज़िंदगी दी है।

उन्होंने कहा कि अब किसी इन्क़िलाब के लिए लाठियां निकालना और तलवार उठाना ज़रूरी नहीं रह गया है। आप जो कुछ भी कहना चाहते हैं वो बेहतर सहाफ़त के ज़रीये कहा जा सकता है और उमुमान उर्दू सहाफ़त के ज़रीये दिया जाने वाला पयाम अपने मक़सद को हासिल कर लेता है।

नायब सदर जमहूरीया ने कहा कि ज़बानें उमुमान ख़ामोशी से मिर्जाती हैं लेकिन इस के पैग़ाम्बर इन ज़बानों का एहया-ए-अमल में लाते हैं। उन्होंने उर्दू ज़बान के फ़रोग़ और उसकी मक़बूलियत में फ़िल्म इंडस्ट्री के रोल की भी सताइश की और कहा कि फ़िल्मी सनअत के नतीजे में उर्दू ज़बान के एहया-ए-में काफ़ी मदद मिली है।

तक़रीब में हामिद अंसारी ने उर्दू सहाफ़त में नुमायां ख़िदमात अंजाम देने वाले मुल्क के मारूफ़ उर्दू सहीफ़ा निगारों में मुख़्तलिफ़ एवार्डज़ भी तक़सीम किए।

एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ां के अलावा अहमद सयद मलीहाबादी और सयद अहमद विनोद महित शकील हुस्न शमसी सयद फैसल अली संजीव सराफ को एवार्डज़ पेश किए गए। जनाब असग़र अली इंजिनियर को भी बाद अज़ मर्ग एवार्ड से नवाज़ा गया।

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