Saturday , December 16 2017

उर्दू- तरक़्क़ी में रुकावट नहीं

उर्दू तालीम को इख़तियार करनेवाली परवीण किनीकर ने आला तालीमी मनाज़िल तय करते हुए ये साबित कर दिया कि उर्दू मीडियम तरक़्क़ी में रुकावट नहीं। वो उन 11 गोल्ड मेडलिस्ट तलबा में शामिल हैं, जिन्हें नामवर सनअतकार रतन टाटा ने तहनियत पेश की।

उर्दू तालीम को इख़तियार करनेवाली परवीण किनीकर ने आला तालीमी मनाज़िल तय करते हुए ये साबित कर दिया कि उर्दू मीडियम तरक़्क़ी में रुकावट नहीं। वो उन 11 गोल्ड मेडलिस्ट तलबा में शामिल हैं, जिन्हें नामवर सनअतकार रतन टाटा ने तहनियत पेश की।

परवीण किनीकर का ताल्लुक़ इस्लामपुर के एक मुतवस्सित ख़ानदान से है। उन्होंने यहां म्यूनसिंपल उर्दू स्कूल में तालीम हासिल की और कॉलिज में इमतियाज़ी निशानात हासिल किए। उन्होंने एमटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स) में टाप रैंक हासिल किया और उनका ख़ुसूसी सब्जेक्ट डिजीटल सिस्टम है।

राजाराम बापू इंस्टीटियूट आफ़ टेक्नोलोजी के 30 वीं कानोकेशन में रतन टाटा ने उन्हें तहनियत पेश की। परवीण किनीकर ने कामियाबी का सहरा अपने घर वालों के सर बांधते हुए कहा कि उर्दू मीडियम उनके लिए कभी रुकावट नहीं रहा। अगर कोई अपने कैरियर की मंसूबाबंदी करते हुए मेहनत करे तो वो अपना निशाना ज़रूर पूरा करसकता है। एमटेक से क़ब्ल प्रवीण ने इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड टैली कम्यूनिकेशन से बी ई किया। उन्होंने सातवीं जमात तक म्यूनसिंपल उर्दू स्कूल में तालीम हासिल की, इसके बाद एच एम ेस उर्दू हाई स्कूल इस्लामपुर से दसवीं मुकम्मल किया। विद्या मंदिर जूनीयर कॉलिज से उन्होंने एच एस सी कामियाब किया।

बी ई मुकम्मल करने के बाद उन्होंने राजा राम बापू इंस्टीटियूट आफ़ टेक्नालोजी में बहैसीयत लेकचरार दो साल ख़िदमात अंजाम दें। वो दुबारा लेकचरार की हैसियत से अपना कैरीयर शुरू करने का मंसूबा रखती हैं।

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