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उर्दू तलबा के लिए सहाफ़त में बहतरीन मौका

ज़हीराबाद 29 दिसंबर: उर्दू मीडियम तलबा को एहसास कमतरी से बाहर आने की ज़रूरत है अगर ये तलबा ख़ुद को ज़माने से हम-आहंग करें तो कामयाबी उनके क़दम चूमेगी। तारीख है कि मादरी ज़बान में तालीम हासिल करने वालों ने दुनिया में अपने इलम-ओ-फ़न का लोहा मनवाया है। ये ख़्यालात थे लिटरेरी फ़ोरम ज़हीराबाद के ज़ेरे एहतिमाम मुनाक़िद हुए सेमिनार से उर्दू मीडियम ग्रेजुएटस और रोज़गार के मौज़ू पर मुनाक़िदा इस सेमिनार से ख़िताब करते हुए फ़ख़र आलम आज़मी एसोसीएट प्रोफेसर ,ख़्वाजा मोईनुद्दीन यूनीवर्सिटी लखनऊ ने कहा कि आज मुल्क खास्कर तेलंगाना में उर्दू मीडियम ग्रेजुएटस के लिए सहाफ़त में बहतरीन मवाक़े हैं।

शर्त ये है कि वो मेहनत करके ख़ुद को काबिल बनाएं और मायूसी का शिकार ना हो। मुमताज़ शायर-ओ-अदीब रऊफ ख़ैर ने कहा कि मादरी ज़बान में अगर महारत हासिल की जाये तो दुसरे ज़बानें सीखने में आसानी होती है। एम ए हमीद ने कहा कि मुलाज़मत यह रोज़गार हासिल करने के लिए मीडियम कोई अहमियत नहीं रखता बल्कि काबिलियत की अहमियत होती है।

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