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उर्दू मीडियम मदारिस की ज़बूँहाली लम्ह-ए-फ़िक्र

हैदराबाद 10 दिसंबर : ( सियासत न्यूज़ ) : उर्दू की तरवीज-ओ-तरक़्क़ी और इस के फ़रोग़ के लिये मुख़्तलिफ़ तौर पर मुख़्तलिफ़ औक़ात में हुकूमत की जानिब से बलंद बाँगदावे किए जाते हैं । लेकिन हक़ीक़त ये है कि ख़ुद हुकूमत का सौतेलाना तरीका का

हैदराबाद 10 दिसंबर : ( सियासत न्यूज़ ) : उर्दू की तरवीज-ओ-तरक़्क़ी और इस के फ़रोग़ के लिये मुख़्तलिफ़ तौर पर मुख़्तलिफ़ औक़ात में हुकूमत की जानिब से बलंद बाँगदावे किए जाते हैं । लेकिन हक़ीक़त ये है कि ख़ुद हुकूमत का सौतेलाना तरीका कार और लापरवाही उर्दू की तरक़्क़ी में रुकावट बन रहा है । जिस का अंदाज़ा उर्दू मीडियम मदारिसकी हालत-ए-ज़ार से बख़ूबी लगाया जा सकता है । जहां ना सिर्फ असातिज़ा की कमी की वजह बच्चों का मुस्तक़बिल तारीक होरहा है बल्कि बुनियादी सहूलतों के फ़ुक़दान की वजह बच्चों का तालीम हासिल करना मुहाल होरहा है कई उर्दू मदारिस उसे हैं जहां फर्नीचर ना होने की वजह तलबा फ़र्श पर बैठने पर मजबूर हैं । कई मदारिस में बच्चों को पीने का पानी तक नसीब नहीं है ।

बैतउलख़ला का भी इंतिज़ाम नहीं है जिस की वजह असातिज़ा और तलबा दोनों को मुश्किलात का सामना करना पड़ता है । तालीमी औक़ात में ज़रूरियात से फ़ारिग़ होने के लिये बच्चे जब घर जाते हैं तो वो अक्सर-ओ-बेशतर दुबारा स्कूल वापिस नहीं आते हैं । इस तरह के और दीगर बुनियादी सहूलतों के फ़ुक़दान की वजह उर्दू मीडियम तलबा तर्क तालीम पर मजबूर होजाते हैं । राजीव विद्या मिशन एस एस ए हैदराबाद के तहत उर्दू मीडियम के ज़्यादा मदारिस कराए की इमारतों में चलाए जाते हैं । जहां कई जमातों के तलबा को एक ही कमरा में तालीम दी जाती है । इलावा अज़ीं कराए की इमारतों में चलाए जाने वाले उर्दू मीडियम मदारिस की अक्सर-ओ-बेशतर मुंतक़ली होती रहती है ।

जिस की वजह से तलबा की तादाद भी कम होजाती है जिस का बहाना बनाकर इन उर्दू मीडियम मदारिस को बंद कर दिया जाता है , साबिक़ कलैक्टर हैदराबाद नवीन मित्तल ने 2007 में तक़रीबा 282 स्कूलों को बंद कर दिया था । बताया जाता है कि डायरैक्टर आफ़ एजूकेशनल को इत्तिला किये बगैर और उन के किसी अहकाम के बगैर इन स्कूलों को बंद कर दिया गया था जो गैरकानूनी है । इस सिलसिला में असातिज़ा और समाजी तनज़ीमों की जानिब से बार बार नुमाइंदगी के बावजूद कोई मुसबत इक़दाम नहीं किया जा रहा है । सिर्फ तीक़न दे कर ख़ामोशी अहतयार करली जा रही है 4 साल के अर्सामें बंद किए गए 282 स्कूलों में से सिर्फ 60 स्कूलों की दुबारा कुशादगी की इत्तिला है ।

वाज़ेह रहे कि क्लास रूम्स की तामीर के लिये ख़ास बजट हुआ करता है लेकिन उर्दू मीडियम मदारिस की इमारत कराए की होने की वजह वो बजट दूसरे मीडियम के मदारिसको चला जाता है । ताज्जुब की बात ये है कि उर्दू मीडियम मदारिस को चलाने के लिये किराया का मकान तलाश करने का काम भी मुताल्लिक़ा असातिज़ा के हवाले किया जाता है । हुकूमत को चाहीए कि उर्दू मीडियम मदारिस की बक़ा के लिये इमारतों को खरीद कर इस में तालीम का इंतिज़ाम करे । साथ ही उर्दू मीडियम मदारिस में असातिज़ा की मख़लुअ जायदादों पर तक़र्रुरी के साथ साथ बुनियादी सहूलतों को फ़राहम करे ताकि उर्दू मीडियमतलबा का मुस्तक़बिल ताबनाक होसके । अक्सर-ओ-बेशतर देखा जाता है कि उर्दू मीडियम की निसाबी किताबें तालीमी साल शुरू होने के काफ़ी अर्सा बाद फ़राहम की जाती हैं ।

बरवक़्त निसाबी किताबों की अदम फ़राहमी की वजह तलबा का तालीमी नुक़्सान होता है । महिकमा तालीमात की लापरवाही और उर्दू मीडियम मदारिस से अदम दिलचस्पी की वजह अक्सर-ओ-बेशतर इमतिहान के पर्चा सवालात इग़लात से भरपूर हुआ करते हैं हालाँकि ए एम ओ उर्दू का रियासती सतह पर और ज़िला पैमाने पर एक ओहदा होता है जो गैर कारकरद है । आर वे एम में एक काबिल उर्दू दां ओहदेदार का होना ज़रूरी है ताकि इमतिहानी पर्चा सवालात वगैरह में अमला-ए-और जुमले दरुस्त हूँ , एक और काबिल-ए-ग़ौर बात ये है कि उर्दू के स्पैशल ऑफीसर को इख़्तयारात कम दीए जाने की वजह उर्दू काज़ की मूसिर तौर पर अंजाम दही में काफ़ी दुशवारी होती है । चुनांचे उर्दू के स्पैशल ऑफीसर को मुकम्मल इख़्तयारात दीए जाएं । इसी तरह आर वे एम , एस सी ई आर टी में तर्जुमा का मुस्तक़िल सेल होना चाहीए ताकि निसाब की तय्यारी में मुश्किलात पेश ना आए ।।

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