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उर्दू यूनीवर्सिटी और सऊदी जामिआत के दरमियान तालीमी तबादले की तजवीज़

हैदराबाद । 22 फरवरी : अरबी , अंग्रेज़ी चीनी हिन्दी और हिसपानवी के बाद दुनिया की 5 वीं बड़ी ज़बान है। क़ुरआन को समझने और सीखने के लिए अरबी की एहमीयत है। ये बात बड़ी ख़ुशआइंद है कि हकूमत-ए-हिन्द और यूनीवर्सिटी ग्रान्ट्स कमीशन के ज़रीया 2

हैदराबाद । 22 फरवरी : अरबी , अंग्रेज़ी चीनी हिन्दी और हिसपानवी के बाद दुनिया की 5 वीं बड़ी ज़बान है। क़ुरआन को समझने और सीखने के लिए अरबी की एहमीयत है। ये बात बड़ी ख़ुशआइंद है कि हकूमत-ए-हिन्द और यूनीवर्सिटी ग्रान्ट्स कमीशन के ज़रीया 20 मर्कज़ी जमिआत में ज़बान अरबी की तालीम का इंतिज़ाम है।

उर्दू यूनीवर्सिटी और सऊदी जामिआत के दरमियान तालीमी तबादला के ज़रीया अरबी को फ़रोग़ की तजवीज़ पर ग़ौर किया जा सकता ही। इन ख़्यालात का इज़हार डाक्टर अली मुहम्मद अलशहरी कल्चरल अताषी सिफ़ारतख़ाना सऊदी अरब दिल्ली ने आज मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी में 2 रोज़ा क़ौमी समीनार हिंदूस्तान में अरबी ज़बान की तदरीस: मुनाहिज और फ़रोग़ के इमकानात के इफ़्तिताही इजलास से बहैसीयत मेहमान-ए-ख़ुसूसी ख़िताब करते हुए किया।

प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां वाइस चांसलर ने सदारत की और प्रोफ़ैसर ज़ुबैर अहमद फ़ारूक़ी साबिक़ सदर शोबा-ए-अरबी जामिआ मुलिया इस्लामीया दिल्ली ने कलीदी ख़ुतबा दिया। डाक्टर अलशहरी ने अपने ख़िताब में मज़ीद कहा कि अरबी ज़बान-ओ-अदब में इस इलाक़ा का इस्लाम की आमद के बाद से अहम रोल रहा है। हिंदूस्तान के बाअज़ अरबी स्कालरस ने बैन-उल-अक़वामी सतह पर अपना लोहा मनवाया है।

समीनार के ज़रीया मौजूदा अरबी तदरीस की ख़ूबीयों और ख़ामीयों का जायज़ा लिया जा सकता ही। शाह अबदुल्लाह सैंटर फ़ार अरबक रियाज़ सारी दुनिया में अरबी ज़बान की तालीम के फ़रोग़ पर काम कर रहा है जिस के ज़रीया सिफ़ारतख़ाना हिंदूस्तान में अरबी ज़बान की तालीम के फ़रोग़ के लिए इक़दामात कर सकता है।

सिफ़ारतख़ाना के ज़रीया सऊदी असातिज़ा की आमद को यक़ीनी बनाया जा सकता है और मुशतर्का तहक़ीक़ी प्रोग्राम मुनाक़िद किए जा सकते हैं। हिंदूस्तान में ख़ुदाबख़्श लाइब्रेरी सालार जंग म्यूज़ीयम वग़ैरा में नादिर अरबी मख़तूतात मौजूद हैं जिन पर तहक़ीक़ की जा सकती है। सऊदी जमिआत में पी जी कोर्सज़ में दाख़िला पर स्कालर शपस की सहूलत है और 2,500 हिंदूस्तानी तलबा ने दाख़िले की दरख़ास्त दी ही।

प्रोफ़ैसर मुहम्मद मियां ने अपने सदारती ख़िताब में कहा कि सऊदी अरब और उर्दू यूनीवर्सिटी में इश्तिराक-ओ-तआवुन आइन्दा बरसों में मुस्तहकम होगा। हिंदूस्तान और सऊदी अरब में तलबा के तबादला प्रोग्राम मुनाक़िद होने चाहिऐं। इस से दोनों जानिब के कल्चर को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

हिंद सऊदी जामिआत ज्वाइंट क्रीड सिस्टम के तहत तालीमी कोर्सज़ चलाने चाहिऐं जिस के सदाक़तनामे दोनों तरफ़ की जामिआत की जानिब से दी जाएं। उन्हों ने आलमी यौम अरबी अगले साल से उर्दू यूनीवर्सिटी में भी मनाने का इरादा ज़ाहिर किया।

प्रोफ़ैसर अबदालमाज़ सदर शोबा-ए-अरबी-ओ-डायरैक्टर समीनार ने अपने ख़ैर मुक़द्दमी ख़िताब में सऊदी कल्चरल अताषी से दरख़ास्त की कि हिंदूस्तानी जमिआत के लिए सऊदी असातिज़ा की ख़िदमात के लिए तआवुन करें। हाफ़िज़-ओ-क़ारी मुहम्मद ज़बीह-उल-ल्लाह की क़रणत कलाम पाक से जलसा का आग़ाज़ हुआ।

डाक्टर अलीम अशर्फ़ जाइसी अस्सिटैंट प्रोफ़ैसर ने मेहमानों का तआरुफ़ पेश किया। डाक्टर जावेद नदीम अस्सिटैंट प्रोफ़ैसर ने शुक्रिया अदा किया और डाक्टर समीना कौसर को आर्डीनेटर समीनार-ओ-अस्सिटैंट प्रोफ़ैसर ने कार्रवाई चलाई। समीनार में मुलक भर की जमिआत के अरबी असातिज़ा-ओ-स्कालरज़ शिरकत कर रहे हैं।

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