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उर्दू यूनीवर्सिटी में बे क़ाईदगियों की शिकायात का जायज़ा लेने ज़फ़र सुरेशवाला का अज़म

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी के चांसलर ज़फ़र सुरेशवाला ने वाज़िह किया कि वो यूनीवर्सिटी के मयार में बेहतरी के साथ साथ तक़र्रुत और दुसरे उमोर में पाई जाने वाली बे क़ाईदगियों पर तवज्जा मर्कूज़ करेंगे।

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी के चांसलर ज़फ़र सुरेशवाला ने वाज़िह किया कि वो यूनीवर्सिटी के मयार में बेहतरी के साथ साथ तक़र्रुत और दुसरे उमोर में पाई जाने वाली बे क़ाईदगियों पर तवज्जा मर्कूज़ करेंगे।

उन्होंने कहा कि वो यूनीवर्सिटी के चांसलर की हैसियत से हर सतह पर यूनीवर्सिटी को एक कामयाब यूनीवर्सिटी में तबदील करना चाहते हैं और वो यूनीवर्सिटी की मौजूदा सूरत-ए-हाल से मुतमइन नहीं। सियासत को दिए गए ख़ुसूसी इंटरव्यू में ज़फ़र सुरेशवाला ने कहा कि उन्हें मुख़्तलिफ़ गोशों से यूनीवर्सिटी में पाई जाने वाली बे क़ाईदगियों के सिलसिले में शिकायात मिली हैं और वो इन का जायज़ा लेते हुए वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल से रुजू करेंगे।

उन्होंने कहा कि यूनीवर्सिटी में एक लाख 65 हज़ार तलबा का दावा किया जा रहा है लेकिन सिर्फ़ 65 हज़ार तलबा ही कोर्सेस से वाबस्ता हैं जबकि एक लाख तलबा के दाख़िले और उनकी हाज़िरी और तालीम के बारे में कोई इत्तेला नहीं। इस तरह वो यूनीवर्सिटी को नामुकम्मिल तसव्वुर करते हैं। वो चाहते हैंके यूनीवर्सिटी में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाते हुए तालीमी मयार में इज़ाफ़ा करें ताके दुसरे यूनीवर्सिटीज़ के साथ उर्दू यूनीवर्सिटी भी तरक़्क़ी की राह पर गामज़न हो। ज़फ़र सुरेशवाला ने कहा कि वो उर्दू यूनीवर्सिटी को दुसरे सेंट्रल यूनीवर्सिटीज़ के मयार पर ले जाना चाहते हैं। इस सिलसिले में वो शोबा तालीम के माहिरीन से मुशावरत कररहे हैं और उनकी राय हासिल करने के बाद ही लायेहा-ए-अमल तए किया जाएगा। तीन माह पहले चांसलर के ओहदे का जायज़ा लेने वाले ज़फ़र सुरेशवाला ने कहा कि यूनीवर्सिटी हुक्काम के बारे में उन्हें काफ़ी शिकायात मिली हैं लेकिन वो सिर्फ़ शिकायात के बजाये उन का हल तलाश करने की कोशिश कररहे हैं।

उन्होंने बताया कि टीचिंग और नान टीचिंग स्टाफ़ से मुताल्लिक़ कई उमोर के बारे में मुख़्तलिफ़ गोशों से उन्हें नुमाइंदगीयाँ वसूल हुई हैं। तेलंगाना से ताल्लुक़ रखने वाले अक़लियती क़ाइदीन और मुख़्तलिफ़ तंज़ीमों ने उन से नुमाइंदगी की। वो इस सिलसिले में यूनीवर्सिटी हुक्काम से रिपोर्ट तलब करेंगे।

उन्होंने बताया कि बैन-उल-अक़वामी यूनीवर्सिटीज़ से उर्दू यूनीवर्सिटी को मरबूत करने के लिए उन्होंने याददाश्त मुफ़ाहमत की जिस पर अमल आवरी का जल्द आग़ाज़ होगा। इस तरह उर्दू यूनीवर्सिटीज़ के दायरा कार में वुसअत पैदा होगी। उन्होंने बताया कि हालिया अर्से में इंडस्ट्री के नान टीचिंग स्टाफ़ ने अपने मुतालिबात के हक़ में हड़ताल का आग़ाज़ किया था। उन्होंने बहैसीयत चांसलर हड़ताली मुलाज़िमीन से रास्त तौर पर बातचीत की और इंसाफ़ का यक़ीन दिलाया जिस के बाद हड़ताल ख़त्म करदी गई।

ज़फ़र सुरेशवाला ने कहा कि टीचिंग और नान टीचिंग स्टाफ़ के साथ मुकम्मिल इंसाफ़ किया जाएगा और किसी भी गोशे से नाइंसाफ़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एतेराफ़ किया कि यूनीवर्सिटी की कई डिग्रियों को मुस्लिमा हैसियत हासिल ना होने के सबब तलबा का मुस्तक़बिल ताबनाक नहीं है।

वो चाहते हैं के यूनीवर्सिटी की डिग्रियों को मुस्लिमा हैसियत हासिल हो ताके फ़ारिग़ होने वाले तलबा इस डिग्री की बुनियाद पर आला तालीम या फिर रोज़गार हासिल करसकें। एक सवाल के जवाब में ज़फ़र सुरेशवाला ने कहा कि चांसलर की हैसियत से वो इख़्तेयारात की कोई परवाह नहीं करते क्युंकि अगर अज़म मुसम्मम हो तो इख़तियार के बगै़र भी सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यूनीवर्सिटी के मुआमलात में सी बी आई तहक़ीक़ात के सिलसिलले में उन से नुमाइंदगीयाँ की गई हैं और वो इन का जायज़ा ले रहे हैं। चांसलर उर्दू यूनीवर्सिटी ने वाज़िह किया कि वो यूनीवर्सिटी में क़वाइद के बरख़िलाफ़ सरगर्मीयों पर तमाशाई नहीं रह सकते और वो सिर्फ़ ओहदे की लालच में नहीं बल्कि यूनीवर्सिटी की तरक़्क़ी के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि अक़लियतों की तालीमी पसमांदगी का ख़ातमा उनकी अव्वलीन तर्जीह है और वो उर्दू यूनीवर्सिटी के ज़रीये इस काम की तकमील के ख़ाहां हैं।

ज़फ़र सुरेशवाला ने कहा कि वो अच्छी तरह जानते हैंके यूनीवर्सिटी में इस्लाहात और उस की कारकर्दगी को किस तरह बेहतर बनाया जाये। वो यूनीवर्सिटी के उमोर के सिलसिले में वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल से रुजू होंगे और ज़रूरत पड़ने पर वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी से भी नुमाइंदगी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यूनीवर्सिटी के मक़ासिद की तकमील उनकी तर्जीह है और यूनीवर्सिटी के उमोर क़वाइद के मुताबिक़ अंजाम दिए जाने चाहीए।ज़फ़र सुरेश वाला ने कहा कि ख़लीजी ममालिक में मुक़ीम हिंदुस्तानी अपने बच्चों की तालीम के बारे में काफ़ी फ़िक्रमंद हैं अगर उर्दू यूनीवर्सिटी फासलाती तालीम का दायरा कार वसी करती है तो ख़लीजी ममालिक में हिंदुस्तानियों के बच्चों की तालीम का मसला हल होगा।

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