उलेमाओं की अपील, मोहर्रम के जुलूस में हथियार लेकर न जाएं

उलेमाओं की अपील, मोहर्रम के जुलूस में हथियार लेकर न जाएं
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पश्चिम बंगाल में मुस्लिम उलेमा और नेताओं ने समुदाय से अपील की है कि मोहर्रम के जुलूस के दौरान हथियार ले जाने से परहेज करें. शहर की मुख्य मस्जिद नखोडा के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वह शुक्रवार को मोहर्रम के दौरान हथियारों के साथ जुलूस निकालने से बचें क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ है.

मौलाना कासमी ने कहा कि हमारे इस्लामी कानूनों में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि मोहर्रम के दौरान हथियारों के साथ जुलूस निकालना चाहिए. मुस्लिम शिया फिरके के मौलाना रिजवी ने हथियार नहीं ले जाने पर मौलाना कासमी की बात से सहमति जताई.

उन्होंने कहा कि हम जुलूस इसलिए निकालते हैं क्योंकि यह दुख का वक्त होता है. जब हम जुलूस निकालते हैं तो हम अपना दुख जाहिर करते हैं, लेकिन हम (शिया) मोहर्रम के जुलूस के दौरान हथियार ले जाने के न पक्ष में हैं और न ऐसा करते हैं.

शिया समुदाय के लिए अहम दिन

मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है, जिसका 10वां दिन शिया समुदाय समेत सभी मुसलमानों के लिए काफी अहम है. शिया समुदाय के लोग इस दिन इस्लाम के आखिरी पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शाहदत को याद करते हैं. वह 680 ईं में हुई करबला की जंग में शहीद हो गए थे. मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन रोजा (व्रत) रखते हैं.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद इदरिस अली ने भी लोगों से मोहर्रम के जुलूस के दौरान हथियार नहीं ले जाने की अपील की है. वहीं, भाजपा नेतृतव ने मुस्लिम उलेमा की अपीलों का स्वागत करते हुए कहा कि यह बंगाल में पिछले कुछ साल में राम नवमी मनाए जाने का असर है.

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