Tuesday , December 12 2017

उड़ीसा में माविस्ट् तशद्दुद का उरूज नाक़ाबिल-ए-क़बूल: चिदम़्बरम

भुवनेश्वर 10 नवंबर (पी टी आई) वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरमने आज इस बात पर तशवीश का इज़हार किया कि उड़ीसा में मर्कज़ी मुसल्लह अफ़्वाज के 10,000 ज़ाइद जवानों की ताय्युनाती के बावजूद माविस्ट् तशद्दुद में कोई कमी वाक़्य नहीं हुई है लिहाज़ा रिय

भुवनेश्वर 10 नवंबर (पी टी आई) वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरमने आज इस बात पर तशवीश का इज़हार किया कि उड़ीसा में मर्कज़ी मुसल्लह अफ़्वाज के 10,000 ज़ाइद जवानों की ताय्युनाती के बावजूद माविस्ट् तशद्दुद में कोई कमी वाक़्य नहीं हुई है लिहाज़ा रियासत उड़ीसा को दीगर रियास्तों और मर्कज़ से सबक़ लेने की ज़रूरत है कि किस तरह माॶसटों के मसाइल से निमटा गया है।

रियास्ती वज़ीर-ए-आला नवीन पटनाइक के साथ मुलाक़ात के बाद अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए मिस्टर चिदम़्बरम ने कहा कि मुझे रियासत के मसाइल का इलम हुआ है लेकिन रियासत उड़ीसा को दूसरी रियास्तों और मर्कज़ से सबक़ लेने की ज़रूरत है और इस तरह रियास्ती इंतिज़ामीया और महिकमा पुलिस माॶटसों से निमटने के तरीका-ए-कार में महारत हासिल करसकते हैं।

उन्हों ने कहा कि माह-ए-अक्तूबर के इख़तताम तक शहरीयों और सीकोरीटी अफ़्वाज की हलाकतों की तादाद 48 होचुकी है लेकिन साल के इख़तताम तक शायद ये बढ़ कर 50 से ज़ाइद होसकती है। इन हलाकतों की तादाद को देखते हुए ऐसा लगता है कि तशद्दुद में कोई कमी वाक़्य नहीं हुई है जो हमारे लिए हरगिज़ काबिल-ए-क़बूल नहीं है।

TOPPOPULARRECENT