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उड़ीसा में सेलाब की क़हर सामान्यायाँ

हर साल औसतन 33 अफ़राद हलाक होते हैं : आदाद-ओ-शुमार भूबनेश्वर । 18 । अक्तूबर (पी टी आई) उड़ीसा में सेलाब का आना अब एक सालाना अमल बन चुका है । ख़ुसूसी तौर पर मौसम बरसात की आमद के साथ ही यहां के अवाम सेलाब और तूफ़ान से बचने की तैय्यारीयां भी श

हर साल औसतन 33 अफ़राद हलाक होते हैं : आदाद-ओ-शुमार भूबनेश्वर । 18 । अक्तूबर (पी टी आई) उड़ीसा में सेलाब का आना अब एक सालाना अमल बन चुका है । ख़ुसूसी तौर पर मौसम बरसात की आमद के साथ ही यहां के अवाम सेलाब और तूफ़ान से बचने की तैय्यारीयां भी शुरू करदेते हैं। इस के बावजूद भी हर साल सेलाब और तूफ़ान में कई क़ीमती जानों का इत्तिलाफ़ होता है जबकि करोड़ों की इमलाक भी तबाह-ओ-बर्बाद होजाती है । जहां तक सरकारी आदाद-ओ-शुमार का ताल्लुक़ ही, इस के मुताबिक़ हर साल सेलाब में औसतन 33 अफ़राद हलाक होते हैं और 322 करोड़ रुपय की इमलाक तबाह-ओ-बर्बाद होती हैं। सेलाब की वजह दरयाए महानदी , स्वर्ण रेखा , ब्रहमनी , बेटा रानी , वसुंधरा और ऋषि कुल्लिया में तुग़यानी आना है। स्पैशल रीलीफ़ कमिशनर के दफ़्तर के एक सीनीयर ओहदेदार ने कहा कि 1980 -ए-ता 2011 -ए-मजमूई तौर पर043 अफ़राद ने अपनी जान से हाथ धोए जबकि इमलाक और फसलों की तबाही का तख़मीना 10,000 करोड़ रुपय लगाया गया।

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