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ऊना पीड़ितों ने कहा धोखे से लाया गया था दिल्ली, बीजेपी का नहीं कर सकते है सर्मथन

नई दिल्ली। पिछले दिनों एक खबर चर्चा बटोरी थी कि गुजरात में ऊना के पीड़ित दलितों ने बीजेपी का प्रचार करने का फैसला किया है। यूपी, पंजाब चुनावों के मद्देनजर इस खबर को बीजेपी की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन अब इस मामले में बड़ी खबर सामने आ रही है। गोरक्षकों के हाथो मार खाने वाले उना पीड़ितों में से एक के भाई जीतू सरवैया ने कहा है वे ऐसा कुछ भी नहीं करने वाले हैं।

नेशनल दस्तक की खबर के मुताबिक ऊना पीड़ितों को धोखे से दिल्ली लाया गया था। उनसे यह कहा गया कि दिल्ली में बौद्ध महासभा और दलित एकता का विशाल कार्यक्रम है। इसे सच मानकर वे दिल्ली पहुंचे थे। बीजेपी या आरएसएस ने वहां तक उन्हें महसूस नहीं होने दिया गया कि यह कार्यक्रम दरअसल किस मकसद से रखा गया है। बाद में मीडिया में यह खबर फैलने लगी वे बीजेपी और आरएसएस के लिए प्रचार कर रहे है।

जीतू ने कहा कि जब हमें पता चला कि यह आरएसएस का कार्यक्रम है तो हम गुजरात अपने घर आने के लिए निकल पड़े। गुजरात आने के बाद मीडिया के जरिए हमें पता चला कि उना के सभी पीड़ित आरएसएस और बीजेपी का प्रचार करने निकले हैं। लेकिन ये सब झूठ है।

पिछले दिनों 15 अक्टुबर को गुजरात भवन में बीजेपी सांसद सत्यनारायण और भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष भांते संघप्रिय के साथ ऊना के पीड़ित भी दिखे थे। बीजेपी ने बताया कि वह एक रथयात्रा का आयोजन करने जा रही है, जिसे पीड़ित दलित युवक हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके बाद से ही मीडिया में कयास लगाया जा रहा था कि दलित युवक बीजेपी का प्रचार करते हुए दिखेंगे।

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