एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर सरकार नया कानून लाने की तैयारी में

एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर सरकार नया कानून लाने की तैयारी में
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स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे कहते है कि खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक के साथ ही पेस्टिसाइड्स के बेतहाशा इस्तेमाल और उससे हो रहे नुकसानों को लेकर सजग है. यही वजह है कि सरकार इससे जुड़े मानक बनाने जा रही है.नए प्रस्तावित कानून के तहत सभी नॉन-वेजिटेरियन उत्पादों में एमआरएल यानी एंटीबायोटिक की अधिकतम मात्रा तय की जाएगी. जिस भी चिकन-मटन शॉप, रेस्टोरेंट या फूड ऑउटलेट पर इससे ज्यादा एमआरएल पाया गया उनके खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी.

बीते हफ्ते इस मसले पर स्वास्थ्य मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है. सरकार प्रस्तावित ड्राफ्ट पर लोगों से मिले सुझाव के बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही नोटिफिकेशन जारी कर देगी. इस कानून के दायरे से मैक्डॉनल्ड और केएफसी से लेकर छोटे रेस्टोरेंट भी आएंगे.

बकरों और मुर्गों को संभावित रोगों से दूर रखने और इस तरह इनमें गोश्त की मात्रा बढ़ाने के लिए तेजी से इंडस्ट्री में बिना रोकटोक इन दवाओं का इस्तेमाल होता है. इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की स्थिति पैदा हो रही है. जिसका मतलब है कि बैक्टीरिया पहले इन दवाओं से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर चुका होगा. और जब ये बैक्टीरिया आपको बीमार करेगा और जब आप इन दवाओं को खाएंगे तो आप पर ये दवाएं बेअसर साबित होंगी.

पिछले दिनों ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से सरकार द्वारा ऐसे नियम लाने की सिफारिश की गई है, जिसके तहत अब डॉक्टर के प्रेसक्रिप्शन के बिना एंटीबायोटिक तक खरीदना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि ऐसे कानून अब भी लागू हैं, लेकिन अब इनको कुछ सख्त नियमों के साथ नए रूप में लाने की तैयारी है। इसका मतलब यह होगा कि अब आप अपने गली के केमिस्ट से कोई भी एंटीबायोटिक अपनी मर्जी से नहीं ले सकेंगे। इस सूरत में डॉक्टरों को भी दो मेडिसिन स्लिप बनाकर देनी होंगी और केमिस्ट्स को इनका साल भर का रेकॉर्ड रखना जरूरी रहेगा। यही नहीं, अगर वही दवाई आपको दोबारा चाहिए, तो इस सूरत में फिर से पर्ची बनवानी पड़ेगी।

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