Friday , January 19 2018

एक्ज़िट पोल कितने सही, दावों पर सवाल खड़े

चाणक्या एजेंसी जिसकी मालकिन बीजेपी लीडर रवि शंकर प्रसाद की बहन

पटना : बिहार में इंतिख़ाब नतीजे आठ नवंबर को आएंगे, लेकिन बिहार में दो अहम इत्तिहाद में इसे लेकर अपने अपने दावे किए जा रहे हैं। सियासी तज़्जीयाकारों का मानना है कि बिहार एसेम्बली का इंतिख़ाब मुल्क की सियासत को एक नया मोड़ दे सकता है। लेकिन रियासती सतह पर मुक़ामी लीडरों का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।

आमतौर पर एक्जिट पोल ये तो बता देते हैं कि किस पार्टी को कितने वोट मिल रहे हैं, लेकिन सीटों को लेकर उनका अनुमान अक्सर गलत साबित होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि किस दल को कितनी सीट मिलेगी, इसका अंदाजा लगाना भले नामुमकिन न हो, लेकिन मुश्किल जरूर होता है। तो सीटों के लेकर किसी तरह का इमकान लगाने से पहले थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। शक का सबसे बड़ा वजह ये है कि अलग अलग एक्जिट पोल के नतीजे काफी अलग अलग हैं। अगर इनका बुनियाद एक ही डेटा या जानकारियां होती हैं तो अदादो शुमार तौर पर इन्हें एक ही अदाद पर पहुंचना चाहिए। जबकि देखा जाए तो कल एक एक्जिट पोल ने एनडीए को 98 सीटें दी तो दूसरे ने 155। इससे साफ है कि कुछ गड़बड़ तो जरूर है। जुमेरात को एक के बाद एक सामने आए एक्जिट पोल चौंकाने वाले थे। ऐसा इसलिए क्योंकि बिहार में 57 सीटों पर हुए रायहुमारी को खत्म हुए अभी मुश्किल से एक घंटा भी नहीं बीता था।
आखरी फेज में एसेम्बली की करीब 25 फीसदी सीटों पर रायशुमारी हुआ। सर्वे करने वाले ये तर्क दे सकते हैं कि उन्होंने आखरी अदादो शुमार तक पहुंचने से पहले मुक़ामी क़िस्म और गुजिशता वोटिंग को जेहन में रखा। लेकिन सच्चाई ये है कि इस तरह की जोड़तोड़ हमेशा गलत साबित हो सकती है। अदादो शुमार के माहिर भी गलती करते हैं या कर सकते हैं। इस मामले में वोटिंग सर्वे करने वाले के दो ग्रुप में से एक जिसकी बहस हम यहां कर रहे हैं, वो या तो बेईमान है या कोई गड़बड़ी कर रहा है।
इसके अलावा टीवी चैनलों समेत एजेंसियों की सियासी अज़म भी एक्जिट पोल के दावों पर सवाल खड़े करती है। टुडेज चाणक्या का दावा है कि एनडीए को 155 सीट मिलेगी, जो कि आधे के आंकड़े 122 से ज़्यादा है। चाणक्या एक ऐसी एजेंसी है जो इंतिख़ाब में भाजपा को मुसलसल ज़्यादा सीटें देती रही है।
कहा जा रहा है कि इसे उस टीवी चैनल पर पेश किया जा रहा है जिसकी मालकिन भाजपा लीडर और मरकज़ी वज़ीर रवि शंकर प्रसाद की बहन हैं। इस मायने में ये एक संगीन हक़ीक़त है।

 

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