Saturday , December 16 2017

एक नौजवान ने इलम-ए-रियाजी़ के मुश्किल(दुस्वर) तरीन मसला का हल ढूंढ निकाला

साईंस दुनिया में एक सनसनी खेज़ वाक़िया पेश आया है। जर्मनी में रहने वाला हिंदूस्तानी नज़ाद सवाला साला शोइरया रियो ज़र्रों के तहर्रुक से मुताल्लिक़ दो उसूली नज़रियात को साबित करने में कामयाब हुवा है।

साईंस दुनिया में एक सनसनी खेज़ वाक़िया पेश आया है। जर्मनी में रहने वाला हिंदूस्तानी नज़ाद सवाला साला शोइरया रियो ज़र्रों के तहर्रुक से मुताल्लिक़ दो उसूली नज़रियात को साबित करने में कामयाब हुवा है।

साईंसदान गुज़शता साढे़ तीन सौ सालों से इस मक़सद के लिए तग-ओ‍दौ(कोशिश) करते रहे थे लेकिन ताक़तवर तरीन कंप्यूटर्स का इस्तिमाल भी इस में मददगार नहीं हुवा था। मशहूर माहिर तिब्बयात आईज़क न्यूटन ने इस पहेली को बूझने (सुल्जना)में पहल की थी। शोइरया ने बताया कि इस ने अपनी सलाहीयत आज़माने के लिए ये काम करने का फ़ैसला किया था।

अब साईंसदान कई अहम सवालात के जवाबात हासिल कर पाएंगे। मज़ीद बरआँ (कोशिश )बैलिस्टिक मीज़ाईलों के तहर्रुक का दरस तरीन अंदाज़ा लगाया जा सकेगा।

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