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एक बार में ‘तीन तलाक’ देना गैर इसलामी: नजमा हेपतुल्ला

नई दिल्ली 1 3 अक्टूबर : मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि एक साथ ‘तीन तलाक’ की परंपरा का कुछ हलकों में गैर इस्लामी व्याख्या की जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘तीन तलाक’ (लगातार तीन बार तलाक बोल कर वैवाहिक संबंध तोड़ना) की परंपरा की गलत ढंग से व्याख्या की जा रही है क्‍योंकि एक बार में तीन तलाक की कोई अवधारणा नहीं है।

इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से इस परंपरा को खत्म करने का अनुरोध करने के मामले में कोई टिप्पणी करने से अलग होते हुए नजमा ने कहा,”यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जहां मैं सही या गलत जवाब दे सकूं कि मैं केंद्र के रुख से सहमत हूं या नहीं मैं इस मुद्दे पर सिर्फ अपने विचार और जो मैं सही महसूस कर रही हूं उसे जाहिर कर सकती हूं”।

उन्होंने कहा कि ज्यादातर इस्लामी देशों ने इस्लाम की सही व्याख्या की है।उन्होंने कहा कि क़ुरआन और पैगंबर मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम)ने कहा है कि जिन्होंने इंसान के साथ अन्याय किया है वे ठीक से धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”जो इस्लाम का दुरुपयोग कर रहे हैं और महिलाओं से समान बर्ताव नहीं कर रहे हैं, वे गलत हैं। मैं जो कहती हूं उसमें यकीन रखती हूं। यहां तक कि एक महिला भी निर्ममता, अन्याय और अन्य हालात में शादी तोड़ने की मांग कर सकती है लेकिन इस बारे में कोई बात नहीं करता।

नजमा ने कहा कि एक साथ ‘तीन बार तलाक’ कह कर तलाक नहीं दिया जा सकता।इसके लिए तीन महीनों में तीन मौकों पर ऐसा किया जाता है और इस पर प्रक्रिया का पालन करना होता है। उसके बाद ही तलाक होती है। जिस तरह से वे इसकी व्याख्या कर रहे हैं वह इस्लामी नहीं है और सही नहीं है।

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