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एक साल में एक लाख अफ़राद को उर्दू ज़बान और रस्म उल ख़त सिखाया जाएगा: वसीम बरेलवी

क़ौमी उर्दू कौंसल बराए फ़रोग़ उर्दू ज़बान (एन सी पी यू एल) के वाइस चेयरमैन और मुमताज़ शायर वसीम बरेलवी ने उत्तर प्रदेश में उर्दू ज़बान की सूरत-ए-हाल पर शदीद तशवीश ज़ाहिर करते हुए बताया है कि उर्दू कौंसल ने रियासत में एक लाख अफ़राद को उर्दू ज़

क़ौमी उर्दू कौंसल बराए फ़रोग़ उर्दू ज़बान (एन सी पी यू एल) के वाइस चेयरमैन और मुमताज़ शायर वसीम बरेलवी ने उत्तर प्रदेश में उर्दू ज़बान की सूरत-ए-हाल पर शदीद तशवीश ज़ाहिर करते हुए बताया है कि उर्दू कौंसल ने रियासत में एक लाख अफ़राद को उर्दू ज़बान और रस्म उल ख़त सिखाने का फ़ैसला किया है और इस काम में कौंसल से वाबस्ता रज़ाकार तंज़ीमों से मदद ली जाएगी।

आज यहां यू एन आई उर्दू सर्विस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद उर्दू ज़बान उत्तर प्रदेश में एक मख़सूस फ़िर्क़ा तक महिदूद होकर रह गई है और हम चाहते हैं कि उर्दू ज़बान के दायरे को वसीअ तर किया जाए और उर्दू वालों के क़ाफ़िले में ग़ैर उर्दू दां लोगों को भी शामिल किया जाए।

उर्दू कौंसल के वाइस चेयरमैन ने कहा कि कौंसल उर्दू के फ़रोग़ के लिए वसीअ पैमाने पर पेशरफ़्त करना चाहती है और ये भी चाहती है कि कौंसल के तहत चलने वाले उर्दू स्टडीज़ सर्किल पूरी तरह मुतहर्रिक हो और उर्दू रस्म उल ख़त को आम करने के लिए हर सतह पर भरपूर कोशिश की जाए।

प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने कहा कि मुल्क भर में उर्दू का सबसे ज़्यादा बुरा हाल उत्तर प्रदेश में हुआ है और उसे बेहतर बनाने के लिए हमें इसी रियासत से उर्दू की तरवीज-ओ-तरक़्क़ी के लिए हमें अपना सफ़र शुरू करना होगा। उन्होंने कहा कि उर्दू की बक़ा के लिए इस का ख्वातीन तक पहुंचना बहुत ज़रूरी है क्योंकि अगर आप ने एक लड़की को उर्दू सिखा दी तो उर्दू नसल दर नसल चलती रहेगी।

वाइस चेयरमैन ने कहा कि कौंसल ने फ़ैसला किया है कि दूर उफ़्तादा इलाक़ों में गुमनामी की ज़िंदगी गुज़ारने वाले उर्दू के क़लमकारों की ख़िदमात को अवाम तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही इन शख़्सियात की एक फ़हरिस्त मुरत्तिब की जाएगी और उन्हें क़ौमी सतह पर रोशनास कराते हुए उन की ख़िदमात को आम किया जाएगा ताकि हमारा मुआशरा उन की ख़िदमात का भी भरपूर एतराफ़ कर सके।

प्रोफे‍सर वसीम बरेलवी ने कहा कि कौंसल ने ये भी तय किया है कि उर्दू की ख़िदमात अंजाम देने वाले नादार और रिटायर्ड लोगों की ग्रुप इंश्योरेंस पालिसी शुरू की जाए और इस ज़िमन में बैंकों और एल आई सी की मदद हासिल की जाए। उन्होंने कहा कि कौंसल के दायरे को वसीअ करने के लिए इस में हिंदूस्तान के हर हिस्से से नुमाइंदगी होनी चाहीए ताकि मुल्क के हर कलमकार की सलाहीयतों और ख़िदमात से मुआशरे को वाक़िफ़ कराया जा सके।

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