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एक साल में भरेंगे तमाम बाकायदा ओहदे

पटना 22 मई : सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाये नौजवानों और लोगों के लिए यह खुशखबरी है। एक तो रियासत हुकूमत ने तमाम महकमों में खाली बाकायदा खतूत पर एक साल के अन्दर तकरीरी का फैसला किया है। दूसरा, बाकायदा तकरीरी में होनेवाले ताखीर को देखते

पटना 22 मई : सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाये नौजवानों और लोगों के लिए यह खुशखबरी है। एक तो रियासत हुकूमत ने तमाम महकमों में खाली बाकायदा खतूत पर एक साल के अन्दर तकरीरी का फैसला किया है। दूसरा, बाकायदा तकरीरी में होनेवाले ताखीर को देखते हुए तय किया गया है कि ज़रूरत के मुताबिक अगले एक साल के लिए मुआहिदा पर तकरीरी होगी। ये दोनों फैसले मंगल को काबिना की बैठक में लिये गये। बैठक के तुरंत बाद आम इंतेजामिया महकमा ने इसका अज़म भी जारी कर दिया। अंदाजा है कि तमाम सरकारी महकमों को मिला कर करीब डेढ़ लाख बाकायदा ओहदे खाली हैं।

काबिना सेक्रेटरी ब्रजेश मेहरोत्र ने बताया कि काबीना ने बाकायदा तकरीरी और कॉन्ट्रैक्ट की बुन्याद पर मंसूबाबंदी को लेकर अहम फैसला किया है. बैठक के बाद आम इंतेजामिया महकमा की तरफ से जारी अहद में कहा गया कि तमाम महकमों की तरफ से उनके तहत तमाम ओहदों पर बाकायदा तकरीरी की कार्रवाई असूलों के मुताल्लिक मुताल्का कमीशन (बीपीएससी और बिहार रियासत कर्मचारी चयन आयोग) के ज़रिये की जाये। एक साल के अन्दर तमाम ओहदों को भरने की कार्रवाई पूरी की जाये। अगर किसी मर्क़जी या मर्कजी स्पांसर मंसूबाबंदी में कॉन्ट्रैक्ट पर तकरीरी का तजवीज़ है, तो उस पर कॉन्ट्रैक्ट पर ही तकरीरी होगी। इसी तरह कमीशन, कॉर्पोरशन, निकाय या रजिस्टर्ड सोसाइटी में भी कानून के मुताबिक मुआह्दे पर तकरीरी होगी।

मालूम हो कि हुकूमत ने 20 दिसंबर, 2012 को मुआह्दे (कॉन्ट्रैक्ट) पर तकरीरी पर रोक लगा दी थी। उसमें यह हिदायत दिया गया था कि जब तक नयी असूल नहीं बन जाती है, तब तक मुआह्दे (कॉन्ट्रैक्ट) पर कोई नयी तकरीरी नहीं होगी। नये फैसले में कहा गया कि अगर जरूरी हुआ, तो रिटायर्ड कर्मियों की मुआह्दे (कॉन्ट्रैक्ट) पर तकरीरी साबिक के असूल के मुताबिक जारी रहेगा। हुकूमत के इस फैसले से डाटा इंट्री ऑपरेटरों को कोई फायदा नहीं मिला है। उन्हें यह उम्मीद थी कि नयी तकरीरी दस्तुरुल अमल में सर्विस बाकायदा करने का बंदोबस्त किया जायेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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