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एक सुलह पर मिलेंगे 500

रांची 13 मई : ग्राम अदालतों में सुलह वालों को कामयाबी पर 500 और नाकामी पर 200 रुपये मिलेंगे। हुकूमत ने ग्राम अदालतों में तकरीरी किये जानेवाले सुलहवालों के लिए फीस की यह रकम तय की है। ग्राम अदालत एक्ट-2008 के तहत रियासत हुकूमत ने भी देहाती इ

रांची 13 मई : ग्राम अदालतों में सुलह वालों को कामयाबी पर 500 और नाकामी पर 200 रुपये मिलेंगे। हुकूमत ने ग्राम अदालतों में तकरीरी किये जानेवाले सुलहवालों के लिए फीस की यह रकम तय की है। ग्राम अदालत एक्ट-2008 के तहत रियासत हुकूमत ने भी देहाती इलाकों में चार ग्राम अदालत खोलने का फैसला किया था।

अदालत की रजामंदी के बाद रियासत के छह ब्लाक में ग्राम अदालत खोलने का फैसला किया गया। इसके तहत बुंडू, जरमुंडी, मधुपुर, बहरागोड़ा, मांडर और झुमरी तिलैया ब्लाक में ग्राम अदालत खोलना है।

हुकूमत ने इन अदालतों को चलाने के लिए दर्ज फेहरिस्त अफसरों और मुलाज़िमों की खिदमत शर्त दस्तूर अमल बनायी है। हर ग्राम अदालत में अदालत के कामकाज के लिए नाजिर, बैंच क्लर्क, ऑफिस क्लर्क, रिकॉर्ड कीपर वगैरा के ओहदे की तशकील किये गये हैं। साथ ही देहि अदालतों में सुलह वालों की तकरीरी का इन्तेजाम किया गया है। सुलहवालों की तकरीरी तीन साल के लिए होगी। बेहतर काम करने पर सुलहवाले की खिदमत कयाम का फिर तौसीह किया जायेगा।

यानि एक सुलह ओहदे की ज्यादा से ज्यादा छह साल तक काम कर सकेगा। सुलहवालों का काम किसी फरीक की तरफ से अदालती मुकदमे की पैरवी न कर तनाज़ों के निबटारे के लिए दोनों फरीकों में सुलह कराना होगा। वह दोनों फरीकों की रजामंदी के बाद सुलहनामा तैयार कर अदालत में पेश करेगा। एक मुकदमे में सुलह कराने में कामयाब होने पर सुलह वालों को 500 रुपये मिलेंगे, वहीं नाकामयाब होने की सूरत में फी मुकदमा 200 रुपये मिलेंगे। लेकिन दोनों ही सूरतों में फीस की यह रकम फी महीने 7000 रुपये से ज्यादा नहीं होगी।

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