Wednesday , December 13 2017

एक स्टेज के किरदार

रिश्त का ख़ातमा नारा बाज़ी या जोश ख़िताबत से नहीं होसकेगा इस के लिए आला मंसूबा बंदी, मुनज़्ज़म समाजी मुहिम, अवामी बेदारी, अवाम की सलाहीयतों और तवानाइयों को बरुए कार लाना होगा। रिश्वत के ख़ातमा के लिए गानधियाई लीडर अन्ना हज़ारे ने फिर एक ब

रिश्त का ख़ातमा नारा बाज़ी या जोश ख़िताबत से नहीं होसकेगा इस के लिए आला मंसूबा बंदी, मुनज़्ज़म समाजी मुहिम, अवामी बेदारी, अवाम की सलाहीयतों और तवानाइयों को बरुए कार लाना होगा। रिश्वत के ख़ातमा के लिए गानधियाई लीडर अन्ना हज़ारे ने फिर एक बार दिल्ली में अपनी अवामी ताक़त का मुज़ाहरा किया और स्टेज पर सयासी पार्टीयों के नुमाइंदों को भी मदऊ कर लिया।

हिंदूस्तान के अवाम को इस स्टेज से रिश्वत के ख़ातमा के लिए हक़ीक़त का कितना शऊर हासिल हुआ ये अलग बेहस है हिंदूस्तान एक कसीर आबादी वाला मुलक है। सियासतदानों ने इस मुल़्क की आबादी को अपने सयासी शऊर की आँख से देखा है।

अन्ना हज़ारे इन सियासतदानों को अपनी आँख से हिंदूस्तान दिखाना चाहते हैं। पार्लीमैंट के तक़द्दुस की पामाली को ये सियासतदां बर्दाश्त नहीं करेंगी। एक दिन आख़िर कार उन्हें ज़ेर कर लेंगे। जैसा कि कांग्रेस ने अन्ना हज़ारे की भूक हड़ताल मुहिम के हवाले से तन्क़ीद की है कि अना हज़ारे पार्लीमैंट की तौहीन कर रहे हैं।

एहतिजाज करना दस्तूरी हक़ है लेकिन इन का अंदाज़ तख़ातब बता रहा है कि वो सरगर्म सियासत में हिस्सा ले रहे हैं। मलिक के एक ख़ास गोशे की हिमायत हासिल करके ज़ाफ़रानी तर्ज़ की मुहिम को अवाम का एक बड़ा गोशा पसंद नहीं करेगा। इस लिए अब तक अना हज़ारे अपने ख़ास मक़सद में कामयाब नहीं हो सके। इन का एहतिजाज सयासी नौईयत से हट कर होतो अवाम को यक़ीन होगा कि इन के पीछे कोई आर एस एस या सिंह परिवार नहीं है।

दिल्ली में भूक हड़ताल के स्टेज से उन्हों ने तमाम सियासतदानों को एक साथ होने का मश्वरा दिया जबकि सियासतदानों ने उन के अंदाज़ एहतिजाज को ही निशाना बनाया है। अन्ना हज़ारे ने सियासतदानों को एक मज़बूत लोक पाल बनाने के लिए पार्लीमैंट में आवाज़ उठाने का मश्वरा दिया और ये भी कहा कि वो पार्लीमैंट में बोलने की हिम्मत नहीं रखते तो सड़कों पर निकल आएं। गानधयाई लीडर की बाअज़ बातों को इस लिए पसंद नहीं किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने ख़ालिस समाजी लानत को ख़तन करने एक ख़ास सयासी गोशे की ताईद हासिल की।

दिल्ली के इजतिमा में अगर चीका इस मर्तबा उन्हों ने कई सयासी पार्टीयों के नुमाइंदों को एक प्लेट पर जमा करने में कामयाबी हासिल की लेकिन पार्लीमैंट पर दबाव् डाल कर अरकान-ए-पार्लीमैंट को उन के किरदार के लिए तन्क़ीद का निशाना बनाया जाय तो इस का कोई हतमी नतीजा बरामद नहीं होगा।

अगर वो अपने मुख़ालिफ़ रिश्वत सतानी एहतिजाज को अह्ले इल्म-ओ-फ़ज़ल से मकालमे को रिवाज दे कर अवामी बेदारी मुहिम में शिद्दत पैदा करते होते आज सूरत-ए-हाल मुख़्तलिफ़ होती मगर अना हज़ारे की टीम को मुख़्तलिफ़ उनवानात से परेशान किया गया या फिर टीम के अरकान की बाअज़ कोताहियों की वजह से ख़राबियां सामने आई हैं इस लिए अवाम की बड़ी तादाद जो कल तक जोश-ओ-ख़ुरोश से उन का साथ दे रही थी अब इस तादाद में कमी देखी गई हैं।

गुज़श्ता कई महीनों से जलसों, रैलियों और नारों के शोर शराबे के बावजूद हुकूमत एक मज़बूत लोक पाल बिल लाने के मुआमले में अपने पैंतरे पर अमल कररही है तो इस का साफ़ मतलब यही है कि हुक्मराँ तबक़ा रिश्वत सतानी के ख़ातमा के मुआमला में दिलचस्पी नहीं रखता।

रिश्वत के ख़ातमा के लिए अज़म का फ़ुक़दान होतो हुकूमत कोई रोड मैप या मंसूबा पर अमल करना नहीं चाहेगी। हुकूमत से हट कर क़ौमी या इलाक़ाई सतह पर रिश्वत के ख़ातमा के लिए बहुत कुछ कोशिशें की जा रही हैं। इस ताल्लुक़ से एहतिजाज और बेदारी मुहिम में मसरूफ़ तंज़ीमों ने इतना कुछ किया है कि ब्यान करना मुम्किन नहीं लेकिन मजाल है जो इस मुल्क के अवाम की तक़दीर में या रिश्वत के ख़ातमा की कोशिशों में किसी मुसबत तबदीली के लिए हुक्मराँ तबक़ा कुछ इक़दामात क्या हो।

कोई क़दम उठाना तो दौर की बात है हुकूमत का कोई कारिंदा इस ताल्लुक़ से कुछ सोचने का भी रवादार नहीं है। हुक्मराँ तबक़ा और सरकारी सिस्टम रिश्वत सतानी के मुआमलों से इतना आलूदा है कि इस की सफ़ाई के लिए बहुत बड़ी तर्बीयत की ज़रूरत होती है।

इस में शक नहीं कि अगर सरकारी ऑफीसर्स और दीगर ज़िम्मा दारान को रिश्वत सतानी की ख़राबियों का दरस दिया जाय तो एक दिन ऐसा आएगा कि वो अपने रिश्वत ज़दा चेहरा को आईना में देख कर तौबा कर लेगा।

रिश्वत की आदत भी बाअज़ दीगर आदतों लानतों की तरह होती है इस से छुटकारा दिलाना मुश्किल है। झूट बोलने वाले ही रिश्वत सतानी का सहारा लेते हैं।

रिश्वत देने और लेने का ये सारा बुनियादी अमल झूट के सहारे पर टिका होता है इस लिए अवाम को ही इस झूट से दूर रहने की तरग़ीब दी जानी चाहिये। एक मज़बूत क़ानून लोक पाल लाने से हो सकता है कि इंसिदाद रिश्वत सतानी का ज़ोर कामयाब हो और रिश्वतखोरी कम हो जाये लेकिन इस का ख़ातमा उस वक़्त तक मुम्किन नहीं है जब रिश्वत लेने और देने वाला झूट से तौबा कर ली।

अना हज़ारे की तजावीज़ पर लोक पाल बिल बन रहा है। पारलीमानी स्टैंडिंग् कमेटी ने भी अन्ना हज़ारे की बाअज़ तजावीज़ को अपनी रिपोर्ट में शामिल करलिया है। इस की तसदीक़ अना हज़ारे का साथ देने वाली सयासी पार्टीयों ने भी की है तो अब ज़रूरत इस बात की है कि एक मज़बूत लोक पाल बिल लाने के लिए पार्लीमैंट की क़तई मंज़ूरी हासिल की जाय मगर पार्लीमैंट के अंदर एक आम सयासी स्टेज में शायद यही फ़र्क़ है कि जो लोग अवाम के सामने बुलंद बाँग दावे करते हैं वो पार्लीमैंट के ऐवान में चुप दिखाई देते हैं। इस को सयासी मिज़ाज कहा जाता है और ये मिज़ाज सियासतदानों के रवैय्या का आईना है।

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