Tuesday , July 17 2018

एक हप्तें में तीन पत्रकारों की मौत, क्या सुरक्षित नहीं है भारत का पत्रकार?

एक हफ्ते में देश के दो राज्यों में हुई तीन पत्रकारों की मौत ने देश भर में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए दिए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दस सालों में पत्रकारों की मौत का एक मामला भी नहीं सुलझा है.

तारीख 26 मार्च, दिन सोमवार, मध्यप्रदेश के भिंड जिले में मोटरसाइकिल सवार पत्रकार संदीप शर्मा को दिन दहाड़े ट्रक कुचल देता है. इसी दिन बिहार के भोजपुर जिले में पत्रकार नवीन निश्चल और उनके साथ विजय सिंह की भी एक वाहन के नीचे आ जाने से मौत हो जाती है. इन दोनों मामलों के अलावा पिछले दिनों ऐसे कई मामले हुए हैं जिनमें पत्रकारों की मौत सवाल खड़े करती हैं.

संदीप 35 साल के युवा पत्रकार थे जो न्यूज वर्ल्ड चैनल के साथ बतौर स्ट्रिंगर काम कर रहे थे. पिछले साल जुलाई में की गई अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में उन्होंने मध्य प्रदेश में रेत खनन कारोबार से जुड़े भष्टाचार को उजागर किया था. अपनी इस रिपोर्ट के बाद संदीप को लगातार धमकियां मिल रही थीं.

ऐसा शक जताया रहा है कि संदीप की मौत, कोई आम सड़क हादसा नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले में कुछ भ्रष्ट पुलिस वालों समेत रेत माफिया गिरोह शामिल है. इस घटना की सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहा है कि एक तेजी से आ रहे ट्रक ने मोटरसाइकिल को रौंद दिया और आगे बढ़ गया.

राज्य सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने का एलान किया है. लेकिन संदीप के करीबियों को इस पर बहुत भरोसा नहीं है. संदीप के दोस्त विवेक शर्मा ने डीडब्ल्यू को बताया, “राज्य का अवैध रेत माफिया बहुत ही मजबूत है. जांच भी एकतरफा होगी. पत्रकारों को इन माफियाओं और इन गिरोहों की ओर धमकियां मिलती रहेंगी.”

वहीं बिहार में मारे गए पत्रकार नवीन निश्चल और उनके साथी विजय सिंह, हिंदी समाचार समूह दैनिक भास्कर के लिए काम करते थे. पुलिस ने इस मामले में पूर्व गांव प्रधान मोहम्मद हरसू को गिरफ्तार किया था. समाचार एजेंसी एसोसिएटिड प्रेस (एपी) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि निश्चल की अपनी मौत से एक दिन पहले हरसू से अपनी किसी रिपोर्ट को लेकर बहसबाजी हुई थी.

पत्रकारों की ये मौतें दिखाती हैं कि अगर वे अपने कामों को सच्चाई के साथ करते हैं तो उनके साथ क्या व्यवहार किया जा सकता है. पिछले कुछ समय में पत्रकारों पर होने वाले हमलों में तेजी आई है. लेकिन यह तेजी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक नजर आती है. इसके बाद फिर ये सवाल उठता है कि क्या इनकी सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है.

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