एग्जिट पोल में दावा- यूपी में बीजेपी को बड़ा झटका, गठबंधन को 56 से ज्यादा सीटों का अनुमान

एग्जिट पोल में दावा- यूपी में बीजेपी को बड़ा झटका, गठबंधन को 56 से ज्यादा सीटों का अनुमान

देश के सबसे बड़े सियासी रण के नतीजे सात चरणों के चुनाव के बाद ईवीएम में कैद हो चुके हैं. ये नतीजे 23 मई को जनता के सामने आएंगे लेकिन उससे पहले एबीपी न्यूज़ और नीलसन ने एग्जिट पोल के जरिए जानने की कोशिश की है कि नतीजों का रुख क्या रहेगा. एबीपी न्यूज़–नीलसन एग्जिट पोल के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 22 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस की झोली में 02 सीटें जा सकती हैं. महागठबंधन के खाते में 56 सीटें जाने का अनुमान है.

 

एग्जिट पोल के आंकड़े का मतलब साफ है. बीजेपी को 2014 के मुकाबले 49 सीटों का नुकसान हो रहा है, जबकि कांग्रेस के लिए कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है. कांग्रेस बिना किसी फायदे या नुकसान के साथ 02 सीटों पर ही कायम है. एग्जिट पोल के आंकड़ों में सबसे बड़ा फायदा महागठबंधन को होता नजर आ रहा है. जहां पिछले लोकसभा चुनाव में सपा केवल पांच सीटें और बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी तो वहीं इस बार दोनों महागठबंन कर उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा है. इसका फायदा इस गठबंधन को मिलता हुआ दिख रहा है.

 

उत्तर प्रदेश में क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमी यूपी की 27 सीटों की बात करें इनमें बीजेपी के हिस्से 06, कांग्रेस के हिस्से में 00, बीएसपी के खाते में 10, एसपी के खाते में 09 और आरएलडी के खाते में 02 सीटें जाने का अनुमान है. अवध क्षेत्र की बात करें तो यहां की 23 सीटों में बीजेपी के हिस्से 07, कांग्रेस के हिस्से में 02, बीएसपी 8 और एसपी के खाते में 6 सीटें जाने का अनुमान है. बुंदेलखंड क्षेत्र की की चार सीटों में बीजेपी के खाते में 1, बीएसपी के खाते में 1 और एसपी के खाते में 2 और कांग्रेस के खाते में 00 सीटें जाने का अनुमान है. पूर्वांचल की 26 सीटों की बात करें तो बीजेपी के हिस्से 08, कांग्रेस के हिस्से में 00, बीएसपी के खाते में 1 और एसपी के खाते में 7 सीटें जा सकती हैं.

 

राज्य में कितनी सीटें
बता दें कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं. लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है. इस लिहाज से दिल्ली की सत्ता हासिल करने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है इसमें कोई शक नहीं. उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हैसियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस राज्य ने देश को 10 प्रधानमंत्री दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दूसरी बार यूपी के बनारस से मैदान में है.

 

पिछली लोकसभा के नतीजे क्या रहे थे?
2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए ने एतिहासिक जी दर्ज की थी. बीजेपी अकेले दम पर राज्य में 71 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए में शामिल अपना दल के खाते में दो सीटें आई थी. अपना दल के कुवर हरिवंश सिंह ने प्रतापगढ़ से चुनाव जीता था और मिर्जापुर से अनुप्रिया सिंह पटेल ने जीत दर्ज की थी. वहीं सूबे की 5 लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी ने कब्जा किया था. फिरोजाबाद से अक्षय यादव और मैनपुरी के साथ दूसरी सीट आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी. वहीं बदांयू से धर्मेंद्र यादव ने चुनाव जीता था. मुलायम परिवार की बहू डिंपल यादव ने कन्नौज से जीत दर्ज की थी, कांग्रेस के खाते में दो सीटें गई थी. रायबरेली से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी जीती थीं तो वहीं अमेठी लोकसभा सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीत दर्ज की थी.

 

वोट प्रतिशत कैसा रहा था?
राज्य में 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के वोट प्रतिशत की बात करें तो बीजेपी 42.63 वोट पाने में कामयाब हुई थी. वहीं कांग्रेस बीएसपी 19.77 प्रतिशत वोट लेकर एक भी सीट नहीं जीत पायी थी. समाजवादी पार्टी भी 22.35 प्रतिशत वोट लेकर सिर्फ 5 सीटें जीत सकी. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 7.53 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे जबकि राष्ट्रीय लोक दल को 0.86 प्रतिशत वोट मिले थे.

 

पिछली विधानसभा के नतीजे क्या रहे थे?
साल 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा की बात करें तो बीजेपी की आंधी में सभी विरोधी दल उड़ गए थे. राज्य की कुल 403 सीटों में से 324 पर बीजेपी गठबंधन, 54 पर एसपी-कांग्रेस गठबंधन, 19 पर बीएसपी और 6 सीटें अन्य के खाते में गई थी. विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत की बात करें तो बीजेपी को 39.7 प्रतिशत मत मिले थे. वहीं एसपी को 21.8 प्रतिशत, बीएसपी 22.2 प्रतिशत, अपना दल 1 प्रतिशत, कांग्रेस को 6.2 प्रतिशत और अन्य को 9.1 प्रतिशत वोट मिले थे.

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