Saturday , December 16 2017

एजुकेशन लोन लेकर नौकरी लगने के बावजूद नहीं लौटा रहे हैं बैंक कर्ज

बैंकों से एजुकेशन लोन लेकर नहीं चुकानेवालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। तालिबे इल्म लोन लेकर पढ़ाई तो पूरी कर ले रहे हैं, नौकरी भी लग जाती है, उसके बावजूद लोन नहीं चुका रहे हैं। बैंक अफसर बताते हैं कि पहले यह बात नहीं थी। हाल के सालो

बैंकों से एजुकेशन लोन लेकर नहीं चुकानेवालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। तालिबे इल्म लोन लेकर पढ़ाई तो पूरी कर ले रहे हैं, नौकरी भी लग जाती है, उसके बावजूद लोन नहीं चुका रहे हैं। बैंक अफसर बताते हैं कि पहले यह बात नहीं थी। हाल के सालों में कर्ज नहीं चुकाने का यह ट्रेंड बढ़ा है। एक अफसर कहते हैं-कुछ तालिबे इल्म सोचते हैं कि जब पैसा नहीं देंगे, तो बैंक उनसे मूआहिदे कर इन्टरेस्ट माफ कर देगा। हर साल बैंक तालिबे इल्म को लोन दे रहा है। तजवीज है कि तालिबे इल्म को जब नौकरी मिल जाये, तो वह बैंक को इत्तिला दे और कर्ज की अदायगी शुरू कर दे।

इसके बाद भी कई तालिबे इल्म नौकरी लगने के बाद न तो इसकी इत्तिला बैंक को दे रहे हैं और न ही रकम लौटा रहे हैं। कुछ मामलों में तो लोन लेने वाले बाइरून मुल्क में नौकरी कर रहा है। अच्छी तनख्वाह भी मिल रही है, लेकिन बैंक का क़र्ज़ नहीं चुकाया जा रहा है।

बैंक अब इस पर सख्त रुख अपनाने जा रहा है। अब ऐसे मामलों में बैंक अकाउंट होल्डर का नाम व तसवीरें अखबार में जारी करने की तैयारी कर रहे हैं। झारखंड के बैंकों ने अब तक 62917 तालिबे इल्म को 2198.84 करोड़ रुपये का एजुकेशन लोन दिया हुआ है। गुजिशता साल 2014-15 के दौरान 3601 तालिबे इल्म को 176.88 करोड़ रुपये का लोन दिया। बैंकर्स के मुताबिक कुल लोन का 13 फीसद एजुकेशन लोन एनपीए हो चुका है।

हुकूमत व बैंकों ने एजुकेशन लोन को देखते हुए लोगों को बेदार करने के मक़सद से तरह-तरह की छूट देने का तजवीज किया है। लड़कियों को बैंकों की तरफ से एजुकेशन लोन के इन्टरेस्ट पर जहां 0.50 फीसद से एक फीसद तक की छूट दी जा रही है। वहीं जिन बच्चों के गार्जियन का सालाना आमदनी 4.50 लाख रुपये हैं, उन्हें एजुकेशन लोन के इंटरेस्ट पर पूरी तरह से छूट दी जाती है। इस मद में झारखंड के बैंकों ने गुजिशता साल ही इन्टरेस्ट में 13.47 करोड़ रुपये की छूट दी है।

रिजर्व बैंक की तरफ से दिये गये हिदायत में बैंकों ने दस्तूरुल अमल में ढील देते हुए तेजी से एजुकेशन लोन बांटें। गुजिशता पांच सालों की बात करें, तो बैंकों के एजुकेशन लोन खाते ढाई गुना बढ़े हैं।

इसके फाइदा लेने वाले तालिबे इल्म की तादाद भी तकरीबन दोगुनी हो गयी है। लेकिन 2011 में जहां कुल एजुकेशन लोन का महज़ चार फीसद ही एनपीए था, वह 2015 तक बढ़ कर 13 फीसद से ज्यादा गया। यानी 36-37 करोड़ रुपये का एनपीए आज बढ़ कर 270 करोड़ से ज्यादा हो गया है।

TOPPOPULARRECENT