Wednesday , December 13 2017

एटमी मिज़ाईल भी दिल्ली का कुछ नहीं बिगाड पाएगी

मुआमले की मालूमात रखने वाले सीनीयर सरकारी हुक्काम के मुताबिक़ राडार लगाना मुल्क के बड़े शहरों को मिज़ाईल कवर देने के अमल का एक हिस्सा है। उगला क़दम मुंबई को पूरा करने के लिए उठाया जाएगा। वाशिंगटन, बीजिंग, पैरिस, लंदन और तल अबीब जैसे दु

मुआमले की मालूमात रखने वाले सीनीयर सरकारी हुक्काम के मुताबिक़ राडार लगाना मुल्क के बड़े शहरों को मिज़ाईल कवर देने के अमल का एक हिस्सा है। उगला क़दम मुंबई को पूरा करने के लिए उठाया जाएगा। वाशिंगटन, बीजिंग, पैरिस, लंदन और तल अबीब जैसे दुनिया के कई शहरों में मिज़ाईल शील्ड हैं।

हिंदूस्तान का मिज़ाईल शील्ड प्रोग्राम गुज़श्ता 2 सालों में सुस्त हो गया है।ये प्रोग्राम साल 2006 में शुरू किया गया था और 2009-12 के दौरान इस के लिए कई टेस्ट भी किए गए थे। अगरचे सीनीयर हुक्काम का कहना है कि 2013 और 2014 में काफ़ी सस्ती आगई थी।

अप्रैल 2014 में एक टेस्ट नाकाम भी हो गया था। हुक्काम ने बताया कि मोदी हुकूमत ने मई में इक़तिदार सँभालने के साथ ही मिज़ाईल शील्ड प्रोग्राम में तेज़ी लाने का हुक्म दे दिया था। इस सिम्त में सब से पहले स्वॉर्डफ़िश को एन सी आर में लगाया गया।ये इसराईल की मदद से बनाया गया राडार है।ये 800 किलोमीटर के फ़ासले से ही मिज़ाईल का पता लगा सकता है ।इस के बाद 2016 तक मिज़ाईल अटरपरेटर यूनिट्स को क़ायम किया जाएगा।

हुक्काम ने बताया कि मिज़ाईल टेस्ट तो बाक़ायदा तौर पर की जाएंगी। इसी हफ़्ते ओडीशा के व्हीलर आईलैंड से एक एयर डीफ़ैंस मिज़ाईल का टेस्ट होगा। व्हीलर आईलैंड मिज़ाईल टेसटग के लिए मुल्क का एक अहम ठिकाना है। मिज़ाईल शील्ड निज़ाम के लिए हर साल दर्जनों मिज़ाईल को बनाने की ज़रूरत होगी। हिंदूस्तान में मिज़ाईल दिफ़ाई निज़ाम में लंबी और मुख़्तसर फ़ासले, दोनों तरह के इंटरसेप्टर्स का इस्तिमाल किया जाता है।

हुक्काम ने बताया कि हिंदूस्तान शॉर्ट रेंज इंटरसेप्टर मिज़ाईल को तैय्यार करने के मुआमले में बेहतर पोज़ीशन में है। लॉंग रेंज सिस्टम के लिए और टेस्ट करने पड़ेंगे। हुक्काम ने बताया कि मोदी हुकूमत का ख़्याल है कि हिंदूस्तान के पास पड़ोस में जौहरी हथियारों की जैसी दौड़ मची हुई है, उसे देखते हुए मिज़ाईल डीफ़ैंस सिस्टम के मुआमले में पीछे छूटना एक बड़ा सैक्योरिटी गैपगा।

हिंदूस्तान ने किसी भी मुल्क के ख़िलाफ़ जौहरी हथियार इस्तिमाल पहले ना करने की जो पालिसी इख़तियार की है, उसे देखते हुए भी मिज़ाईल शील्ड की एहमीयत ज़्यादा है, पाकिस्तान इस पालिसी को नहीं मानता है।

इक़तिदार में आने के बाद मोदी हुकूमत ने जिस बड़े मंसूबे की मंज़ूरी दी थी, वो डी आरडी ओ में एक अरब डालर की लागत से ऐसा सिस्टम तैय्यार किया था, जिस से बेहद ज़रूरी सीकर सिस्टमज़ जा सके।

मिज़ाईल से जब निशाना लगाया जाता है, तो टार्गेटिंग के फाईनल फ़ैज़ में सीकर सिस्टमज़ ही मिज़ाईल की सिम्त तै की जाती है। इस फ़ैक्ट्री के हैदराबाद के क़रीब बनाए जाने का इम्कान है।

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