Friday , August 17 2018

एडिटर्स गिल्ड ने दिखाए तेवर, मोदी सरकार को लिया आड़े हाथ

एडिटर्स गिल्ड आफ इंडिया ने आज दो टीवी चैनलों के वरिष्ठ पत्रकारों के इस्तीफे और सत्तारूढ पार्टी भाजपा के आलोचनात्मक कार्यक्रम के प्रसारण सिग्नल लगातार बंद होने की घटनाओं पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मीडिया की स्वतंत्रता के साथ ‘‘हस्तक्षेप’’ के सरकार के ‘‘सभी प्रयासों’’ की निंदा की।

 

गिल्ड ने एक बयान में प्रेस की आजादी को दबाने के मकसद से नापाक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की और उन्होंने मीडिया मालिकों से सरकार या किसी अन्य शक्ति के राजनीतिक दबाव के सामने नहीं झुकने की गुजारिश की।

मीडिया संगठनों की संस्था ने मांग की कि एनडीए सरकार टेलीविजन कार्यक्रम सिग्नलों में बाधा के मामलों पर संज्ञान लेने, इसकी जांच करने और इस बारे में स्पष्टीकरण देने की मांग की कि किन हालातों में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। गिल्ड ने कहा कि इस तरह की कोशिश मीडिया की आजादी की बुनियादों और भारत के लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है।

 

गिल्ड ने कहा, ‘उसे (सरकार) राष्ट्र को यह भी भरोसा देना चाहिए कि प्रत्यक्ष या परोक्ष या किसी एजेंसी के जरिए वह इस गतिविधि में शामिल नहीं है। और अगर वह नहीं है तो इन नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए। वायु तरंगों की स्वतंत्रता से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।’

 

गिल्ड की ओर से यह सख्त बयान ऐसे वक्त आया है, जब कुछ दिन पहले एक खास टीवी न्यूज चैनल के प्रबंध संपादक और दो एंकरों ने इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस का आरोप है कि उन्होंने मोदी सरकार की आलोचनात्मक खबरें चलाने पर सरकार के दबाव में पद छोड़ा।

संस्था ने कहा कि बीते कुछ दिन में कम से कम दो इलेक्ट्रानिक मीडिया चैनलों के वरिष्ठ पत्रकारों ने सामने आकर कहा है कि उनके नियोजकों ने कंटेंट में कटौती या इसे हल्का बनाने का प्रयास किया ताकि इसे सरकार के प्रति कम आलोचना वाला बनाया जा सके, इस वजह से उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

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