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एड्स के ख़िलाफ़ आलमी जंग को ख़तरा:आलमी इदारा-ए-सेहत

आलमी इदारा-ए-सेहत WHO के मुताबिक़ एड्स के ख़िलाफ़ आलमी जंग को पाँच हाई रिस्क ग्रुपों में इस बीमारी की बहुत ऊंची शरह की वजह से शदीद ख़तरात लाहक़ हैं।

आलमी इदारा-ए-सेहत WHO के मुताबिक़ एड्स के ख़िलाफ़ आलमी जंग को पाँच हाई रिस्क ग्रुपों में इस बीमारी की बहुत ऊंची शरह की वजह से शदीद ख़तरात लाहक़ हैं।

इन ग्रुपों में हमजिंस परस्त मर्द, जिस्म फ़रोश ख़वातीन, सिरिंजों के ज़रीये मुनश्शियात इस्तेमाल करने वाले लोग और क़ैदी सब से नुमायां हैं। एसे अफ़राद एड्स‌ का सबब बनने वाले HIV वाइरस से बचाओ के लिए सब से कम एहतियाती तदाबीर इख़तेयार करते हैं।

जिनेवा में आलमी इदारा-ए-सेहत के एड्स‌ से मुताल्लिक़ शोबे के सरबराह गोट फ्रेड हिरन शाल (Gottfried Hirnschall) ने जुमे के रोज़ एक ब्रीफिंग में सहाफ़ीयों को बताया कि आलमी सतह पर एड्स‌ के ख़िलाफ़ कोशिशें आबादी के एसे मख़सूस हिस्सों की वजह से नाकाम हो रही हैं।

उस वक़्त दुनिया भर में एच आई वी वाइरस से मुतास्सिरा अफ़राद की तादाद 35.3 मिलियन है और एड्स‌ की बीमारी हर साल 1.6 मिलियन इंसानों की जान ली है।

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