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एदारा-ए-शरिया का राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन, कहा शरीअत में दखल बरदाश्त नहीं

रांची : इसलामिक शरीअत में हस्तक्षेप बरदाश्त नहीं किया जायेगा़ सरकार अगर हस्तक्षेप करती है, तो मुसलिम समुदाय आंदोलन करेगा. उक्त बातें एदारा-ए-शरिया के राज्य पदाधिकारियों, काजियान-ए-शरीअत व मुफ्तियान-ए-कराम ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में कही. उलेमाओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विधि आयोग की स्थापना करना गलत है. तलाक, सलासा, हलाला, खुला, चार शादी जैसे मुद्दों के विरोध में सरकार ने विवाद खड़ा कर दिया है.

इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा तलाक के मसले पर सुप्रीमकोर्ट में दाखिल किये गये हलफनामा की भी निंदा की गयी. उन्होंने कहा कि लॉ कमीशन ने जिन 16 मामलों में सर्वेक्षण की बात कही है, लगातार एदार-ए-शरिया उनसे सवाल भी कर रहा है, मगर अब तक कमीशन द्वारा इन सवालों का जवाब नहीं दिया गया है. 10 नवंबर से पहले शरीअत में हस्तक्षेप के विरोध में राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा जायेगा.
वहीं राज्य के सभी जिलों के डीसी को 12 नवंबर को राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन दिया जायेगा.लोगों से अधिक-से-अधिक तादाद में हस्ताक्षर करके इ-मेल या जिला समितियों में 12 नवंबर जमा करने का आग्रह किया गया है. संवाददाता सम्मेलन में मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी, मौलाना अब्दुल मोबीन, गुलाम मोइनुद्दीन, मौलाना रियाजउद्दीन, मौलाना मुम्ताज मिसबाही, सइद इदरीसी,मुफ्ती अनवर निजामी, मौलाना सैयद अलकमा शिबली, कारी जान मोहम्मद आदि ने विचार रखे.

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