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एनकाउंटर में मारे गए सिमी के सदस्यों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, सीने पर लगी थीं गोलियां

भोपाल : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सेंट्रल जेल से फरार होने के बाद पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सिमी के सदस्यों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में अधिकांश आतंकियों के सीने पर गोलियों के कई निशान मिले हैं. जानकारी के अनुसार, एनकाउंटर में मारे गए सभी आठ आतंकियों का भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश सिमी के सदस्यों को कमर के ऊपर गोली लगी हैं. सिमी के सदस्यों के शरीर पर गोली लगने और फिर उसके बाहर निकलने के कई निशान हैं. कपड़ों को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है.

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक

-ज़्यादातर के सीने और छाती पर लगी गोलियां
गोली के दो जख्म हर कैदी को हैं, कइयों को दो-चार से भी ज्यादा
कुछ के पैरों पर भी लगी गोलियां
चार लोगों के शरीर से आर-पार हुई गोलियां
चार के शरीर में मिले कुछ छर्रे
तीन तरफ से गोली लगने के मिले निशान
कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है

ये लोग खड़े थे और उन पर गनफायर किया गया. इस बात की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है. सिमी से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों के फरार होने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. भोपाल के पुलिस महानिरीक्षक योगेश चौधरी के मुताबिक, इन कैदियों ने टूथब्रश (प्लास्टिक) और लकड़ी से चाबियां बनाई थीं और इसी से ताला खोलकर बैरक से बाहर आए. उन्होंने बताया कि भोपाल जेल में सिमी से जुड़े कुल 29 विचाराधीन कैदी हैं. इनमें से आठ दो बैरकों में थे. इन आठों ने टूथब्रश सहित अन्य सामान से चाबियां बनाई थीं. ताला खोलने के बाद उन्होंने प्रहरी रमाशंकर यादव की गला रेतकर हत्या की और चंदन सिंह के हाथ-पैर बांध दिए, फिर चादरों को रस्सी की तरह इस्तेमाल कर 25 फीट ऊंची दीवार फांद कर भाग गए. उन्होंने आगे बताया कि सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने गुनगा थाने के मडीखेड़ा के पठार क्षेत्र में खेजरा नाला के पास उन्हें घेरा. इस पर फरार विचाराधीन कैदियों ने गोली चलाई और धारदार हथियार से पुलिस बल पर हमला किया. इस हमले में तीन पुलिस जवानों को चोटें आई हैं.

यह भी कहा कि उनके पास देसी कट्टे थे और उन्होंने पुलिसवालों पर गोली चलाई, लेकिन उनकी कोई खास डीटेल सामने नहीं आई है. जो तीन पुलिसवाले घायल हुए हैं, उन्हें भी गोली लगने के घाव नहीं हैं. यहीं नहीं सवाल ये भी हैं कि इन कैदियों के पास इतनी चादरें कहां से आईं और टूथ ब्रश से उन्होंने चाबी कैसे बनाई…. इस एनकाउंटर पर कई सवाल हैं, जिनके जवाब मिलने बाकी हैं.

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