Monday , December 11 2017

एनडीए सरकार में ICHR प्रमुख रहे एमजीएस नारायण ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को बताया बेवकूफी भरा फैसला

नई दिल्ली : सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को बजाए जाने वाले फैसले को इतिहासकार एमजीएस नारायण ने बेवकूफी भरा बताया है|  इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरियल रिसर्च (ICHR) के पूर्व चेयरमैन हैं | नारायण को  एनडीए सरकार में ICHR का प्रमुख बनाया गया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान पर आया फैसला लोकतंत्र के खिलाफ है | उन्होंने कहा कि ये उनका ध्यान ‘तानाशाही’ की तरफ ले जाता है |

नारायण ने  मातृभूमि नाम की मैगजीन से बात करते हुए नारायण ने कहा कि लोगों पर दबाव बनाकर राष्ट्रवाद की भावना किसी पर दबाव बनाकर पैदा नहीं की जा सकती, यह अपने आप आना चाहिए | राष्ट्रवादी भावना का प्रचार इस तरीके से नहीं हो पाएगा। सिनेमाघर में लोग एंटरटेनमेंट के लिए आते है| उन्होंने कहा कि इस फैसले का पालन नहीं किया जायेगा ये फेल हो जायेगा | उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले का सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक प्रभाव होगा|

उन्होंने कहा कि , ‘संविधान के आर्टिकल 51(ए) में साफ तौर पर कहा गया है कि राष्ट्र और उसके प्रतीकों का सम्मान न्यायिक बल का इस्तेमाल करके नहीं करवाया जा सकता।’ उन्होंने 1986 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को याद किया जिसमें ईसाई धर्म मानने वाले बच्चों को राष्ट्रगान ना गाने की इजाजत दी थी|
भारत को राष्ट्र मानने से इनकार करते हुए नारायण ने कहा कि इसे देशों या जातीयता का महासंघ कहा जा सकता है लेकिन एक देश नहीं| नारायण को इतिहास के बारे में जानकारी रखने वाले प्रमुख लोगों में शामिल किया जाता है|

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