एनडीटीवी बैन: मीडिया की हत्या मत करो- सगारिका घोष

एनडीटीवी बैन: मीडिया की हत्या मत करो- सगारिका घोष
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा हिंदी न्यूज़ चैनल एनडीटीवी पर एक दिन के बैन लगाये जाने पर सोशल मीडिया में सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। केंद्र सरकार ने एनडीटीवी पर पठानकोट हमलों की कवरेज के दौरान संवेदनशील जानकारियां देने के आरोप में ये प्रतिबंध लगाया है जो की सरासर गलत है और इसे अघोषित आपत्काल भी समझा जा रहा है। कई पत्रकारों ने इस पर अपना विरोध जताया है।

जाने माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने केंद्र की भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि “भारत के सबसे संयमित और ज़िम्मेदार चैनलों में से एक एनडीटीवी इंडिया को प्रसारण मंत्रालय एक दिन के लिए बंद कर रहा है। आज एनडीटीवी है, कल कौन होगा? वहीँ एक और पत्रकार सगारिका घोष ने ट्वीट कर कहा कि “एनडीटीवी को प्रतिबंधित करना स्वतंत्र मीडिया पर सरकार का चौंकाने वाला शक्ति प्रदर्शन है। मीडिया की हत्या मत करो” पत्रकार सिद्धार्थ वर्दराजन ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी पर सरकार का एक दिन का प्रतिबंध सरकार की मनमानी और ताक़त का दुर्भावनापूर्ण उपयोग है। एनडीटीवी को इसे अदालत में चुनौती देनी चाहिए।

कांग्रेस से जुड़े तहसीन पूनावाला ने लिखा, “अगर एनडीटीवी ऑफ़ एयर हुआ तो मैं प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर ऑनलाइन एनडीटीवी देखूंगा.”
वहीं कुछ लोगों ने इसे अघोषित आपातकाल तक कहा है। सुख संधू ने लिखा, “बीजेपी सरकार ने मीडिया चैनलों को सलाह दी है, धमकियां दी हैं और अब प्रतिबंध भी लगा दिया है. भारत में आपातकाल जैसे हालात हैं”। डॉ. मुग्धा सिंह ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी को एक दिन के लिए ऑफ़ एयर होना पड़ेगा, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ शक्तिहीन हो गया है। हिटलरशाही लौट रही है, इस बार मोदी सरकार के नाम से”।

रचित सेठ लिखते हैं, “सरकार पठानकोट पर जाँच के लिए आईएसआई को ख़ुशी-ख़ुशी बुला सकती है, लेकिन अगर एनडीटीवी इंडिया या कोई और चैनल इस बारे में ख़बर दिखाता है तो उन्हें इससे समस्या है.”
अपरा वैद्य ने ट्वीट किया, “अभी सरकार को तीन साल भी नहीं हुए हैं और हम आपातकाल के काले दौर में पहुँच गए हैं.”

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