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एन डी ए को तक़रीबन 200 नशिस्तें मिल सकती हैं:आमिर अली ख़ां

मुल्क में इस बात का हव्वा खड़ा किया गया हैके मोदी की लहर है लेकिन एसा हरगिज़ नहीं है। आम चुनाव में बी जे पी क़ाइदीन एन डी ए को 300 से ज़ाइद नशिस्तों पर कामयाबी हासिल होने के इमकानात ज़ाहिर कररहे हैं लेकिन हक़ीक़त में बी जे पी 60-170 नशिस्तें ही ह

मुल्क में इस बात का हव्वा खड़ा किया गया हैके मोदी की लहर है लेकिन एसा हरगिज़ नहीं है। आम चुनाव में बी जे पी क़ाइदीन एन डी ए को 300 से ज़ाइद नशिस्तों पर कामयाबी हासिल होने के इमकानात ज़ाहिर कररहे हैं लेकिन हक़ीक़त में बी जे पी 60-170 नशिस्तें ही हासिल कर पाए गी, जबकि उसकी हलीफ़ जमातों को 15-20 नशिस्तें हासिल होंगी।

इस तरह एन डी ए ज़्यादा से ज़्यादा 200 नशिस्तों के निशाना तक ही पहुंच सकती है। इन ख़्यालात का इज़हार मुक के मआशी, सियासी और तहज़ीबी-ओ-सहाफ़ती उमोर के माहिरीन की एक क़ौमी तंज़ीम के ज़ेरे एहतेमाम मुबाहिस में हिस्सा लेते हुए न्यूज़ एडीटर सियासत आमिर अली ख़ां ने किया।

इस मुबाहिसा में मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और पटना से ताल्लुक़ रखने वाले माहिरीन तालीम , सहाफ़ी और दानिश्वरों ने हिस्सा लिया जिन में दैनिक जागरण के साबिक़ ब्यूरो चीफ़ और दैनिक भास्कर के मौजूदा एडीटर अनशोमन तीवारी, प्रोफेसर संजय कुमार (बिहार) , सौरभ मुकर्जी( मुंबई )ने हिस्सा लिया।

टैली कान्फ्रेंसिंग के ज़रीया किए गए इस मुबाहिसा में हिस्सा लेने वाले तमाम माहिरीन ने बी जे पी को 200-220 नशिस्तें हासिल होने की पेश क़ियासी की।

इस मुबाहिसा का मौज़ू ओपीनियन पोल, कहाँ तक सही कहाँ तक ग़लत रखा गया था। आमिर अली ख़ां , अनशोमन तीवारी, प्रोफेसर डॉ संजय कुमार के अलावा सेरभ मुकर्जी ने इस ख़्याल का इज़हार किया कि फ़िलवक़्त मुल्क में जो भी ओपिनियन पुलिस किए जा रहे हैं उसे बढ़ा छुट्टी कर पेश किया जा रहा है हालाँकि ज़मीनी हक़ायक़ कुछ और ही हैं।

जहां आमिर अली ख़ां ने बी जे पी की ज़ेर क़ियादत एन डी को ज़ाइद अज़ 200 नशिस्तें हासिल होने की पेश क़ियासी की वहीं अनशोमन तीवारी का कहना हैकेएन डी ए इत्तेहाद 220 नशिस्तों से ज़्यादा नशिस्तें हासिल नहीं करसकेगा।

डॉ संजय कुमारिका कहना था कि ओपिनियन पुलिस में जो आदाद-ओ-शुमार पेश किए जा रहे हैं इन का दरुस्त साबित होना ज़रूरी नहीं है, इस के बावजूद फ़िलवक़्त क़ौमी सतह पर कौन कितनी नशिस्तें हासिल करेगा ये बताने के मौक़िफ़ में नहीं, इस के लिए पारलीमानी हलक़ों में अवाम की राय जानना ज़रूरी होता है।

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