Saturday , December 16 2017

एफडी आई के तबाहकुन असरात : जमात-ए-इस्लामी

नई दिल्ली ०४ दिसंबर: (यू एन आई) जमात-ए-इस्लामी हिंद ने रीटेल सैक्टर में रास्त ग़ैर मुल्की सरमाया कारी (DI) की सरकारी मंज़ूरी कुमलक और अवाम के हक़ में इंतिहाई नुक़्सानदेह क़रार देते हुए दावा किया है कि इस के मुल्क के समाजी और इक़तिसादी निज़ाम प

नई दिल्ली ०४ दिसंबर: (यू एन आई) जमात-ए-इस्लामी हिंद ने रीटेल सैक्टर में रास्त ग़ैर मुल्की सरमाया कारी (DI) की सरकारी मंज़ूरी कुमलक और अवाम के हक़ में इंतिहाई नुक़्सानदेह क़रार देते हुए दावा किया है कि इस के मुल्क के समाजी और इक़तिसादी निज़ाम पर दूर रस और तबाहकुन असरात मुरत्तिब होंगे ।

जमात-ए-इस्लामी के नायब अमीर मुहम्मद जाफ़र ने आज यहां एक प्रैस कान्फ़्रैंस में हुकूमत से मुतालिबा किया कि एफडी आई के फ़ैसले को फ़ोरा वापिस ले क्यों कि इस की वजह से मुल्क के साढे़ चार करोड़ छोटे ताजिरों को बराह-ए-रास्त और तक़रीबन 5 करोड़ लोगों को बिलवासता सख़्त नुक़्सान हो सकता है।

उन्होंने इस इस्तिदलाल के साथ कि ये फ़ैसला आम आदमी के मुफ़ादात पर ज़रब लगाता है उसे मुल्की मईशत केलिए बेहद ख़तरनाक और क़ौमी आज़ादी और ख़ुदमुख़तारी केलिए भी तशवीशनाक बताया।

जमात-ए-इस्लामी के रहनुमा एजाज़ अहमद असलम ने तशवीश ज़ाहिर की कि एफडी आई के फ़ैसले से बेरोज़गारी में इज़ाफ़ा होगा और ज़राअती शोबा को भी सख़्त नुक़्सान पहूंच सकता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह मुल़्क की कम अज़ कम पच्चीस करोड़ आबादी को बड़े ताजिरों के रहम-ओ-करम पर छोड़ देना संगीन नताइज सामने ला सकता है। इस मौक़ा पर जमात-ए-इस्लामी के राबिता आम्मा सैक्रेटरी अनजीनर मुहम्मद सलीम ने इस बात पर सख़्त तशवीश का इज़हार किया कि हुकूमत दवा साज़ी के सैक्टर में भी रास्त ग़ैर मुल्की सरमाया कारी की हिमायत कर रही है ।

उन्हों ने कहा कि इस से ग़रीब अवाम केलिए ईलाज-ओ-मुआलिजा मुश्किल तर हो जाएगा। उन्हों ने याद दिलाया कि अवाम को तालीम ओ रसहत की फ़राहमी हुकूमत की ज़िम्मेदारी है। जमात-ए-इस्लामी ने अवाम से अपील की कि वो हुकूमत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ उठ खड़े हो और उसे अपना फ़ैसला वापिस लेने केलिए मजबूर कर दें।

TOPPOPULARRECENT