Wednesday , December 13 2017

एय‌र इंडिया पायलेटों की हड़ताल जारी(चल रहि है)

नई दिल्ली। एय‌र इंडिया के पायलेट अपने मौक़िफ़ पर क़ायम हैं और छटे दिन भी हड़ताल जारी रहने की वजह से 20 इंटरनैशनल फ़लाईटस मंसूख़(रद) करदी गईं जिस की वजह से हज़ारों मुसाफ़िरों को मुश्किलात का सामना करना पड़ा(तकलीफें उठाना पडी)।

नई दिल्ली। एय‌र इंडिया के पायलेट अपने मौक़िफ़ पर क़ायम हैं और छटे दिन भी हड़ताल जारी रहने की वजह से 20 इंटरनैशनल फ़लाईटस मंसूख़(रद) करदी गईं जिस की वजह से हज़ारों मुसाफ़िरों को मुश्किलात का सामना करना पड़ा(तकलीफें उठाना पडी)।

एय‌र इंडिया के ओहदेदार ने बताया कि पायलेट अब तक रुजू बकार(काम पर वापिस) नहीं हुए हैं जिस की वजह से हम ने दिल्ली और मुंबई से 20 परवाज़ें मंसूख़(रद) करदी हैं। इस दौरान वज़ीर शहरी हवाबाज़ी अजीत सिंह ने करण थापर के प्रोग्राम में शिरकत करते हुए कहा कि एय‌र इंडिया को बचाने का वाहिद रास्ता यही है कि उसे ख़ानगी शोबा(निजी डिपार्मेंट) के हवाले कर दिया जाये।

उन्हों ने इस तजवीज़(राय) पर ग़ौर करने का इशारा दिया है। उन्हों ने कहा कि एय‌र इंडिया को सही रास्ते पर लाना हमारा मक़सद है ।
और इस के लिए मुम्किना राहें(ताकत भर) तलाश की जाएंगी।

उन्हों ने बताया कि वो दिन गुज़र चुके जब फ़िज़ाई(हवाइ) कंपनी को सरकारी सरपरस्ती हासिल हुवा करती थी , आज हम दीगर ममालिक की जानिब(दूसरे देशों कि तरफ) देखते हैं कि कहीं भी फ़िज़ाई(हवाइ) कंपनी को इस तरह सरकारी सरपरस्ती हासिल नहीं है। उन्हों ने ये बात तस्लीम की(मान ली) कि एय‌र इंडिया और इंडियन एय‌र लाइंस के इंजेमाम(आपस में मीला देने) से मत्लूबा नताइज बरामद नहीं हुए(चाहत के मुताबीक नतीजें नहि नीकले)।

हम ने जिस तरह की मंसूबा बंदी की थी, नतीजा वैसा नहीं निकला। अजीत सिंह ने कहा कि इन की ज़िम्मेदारी मौजूदा सूरत-ए-हाल (अभी चल रहे हालात)से निमट्ना है। माज़ी की(पीछ्लि) ग़लतीयों से सीख कर हमें एय‌र इंडिया को कामयाब बनाना होगा।

एक सवाल के जवाब में उन्हों ने कहा कि इस वक़्त हुकूमत की अव्वलीन तर्जीह(पहला काम) एय‌र इंडिया को कारकरद(चुस्त) बनाना है। उन्हों ने ये बात भी तस्लीम की(मानली) कि किसी सरवीस इंडस्ट्री जैसे एय‌र लाइंस को हुकूमत के लिए चलाना काफ़ी मुश्किल है जहां सारिफ़(खर्च करने वाले) बादशाह गिर होते हैं। अजीत सिंह ने कहा कि सरकारी अवामी शोबा(जनता वीभाग) के इदारों(संस्थाओं) में किसी की भी मिसाल ले लीजिए , सरकारी कंपनी में काम का अंदाज़ बिलकुल मुख़्तलिफ़(अलग) होता है। इस के बरअक्स(खीलाफ) ख़ानगी शोबा की(नीजी) कंपनीयों में काम का अंदाज़ जुदागाना(अलग) होता है, हालाँकि ये दोनों कंपनीयां माहिरीन ही चलाते हैं।

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