एर्दोगान के सूझबूझ का दिख रहा है असर, मुस्लिम देशों को बर्बाद करने वाले दुश्मन खाने लगे हैं खौफ़!

एर्दोगान के सूझबूझ का दिख रहा है असर, मुस्लिम देशों को बर्बाद करने वाले दुश्मन खाने लगे हैं खौफ़!
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त्रिपक्षीय बैठक के बाद बुधवार को एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया कि, तुर्की, ईरान और रूस सीरिया की “जमीन पर अमन और शांति कायम करने के लिए अपने प्रयासों की गति” को तेज़ी से बढ़ा देंगे। तीनों देश सीरिया के नागरिकों की रक्षा करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे है।

बैठक के बाद एक संयुक्त कांफ्रेंस में, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान ने कहा कि तुर्की सीरिया में अपनी जिम्मेदारियों से अवगत है और उन्हें अत्यंत सावधानी से पूरा कर रहा है।

“तुर्की ने सीरिया में 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र को आतंकवादियों के चंगुल से मुक्त कराया है। साथ ही आफरीन के सभी नागरिकों को सुरक्षित रखा है।

राष्ट्रपति एर्दोगान ने कहा कि सीरिया के क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए सभी आतंकवादी समूहों से समान दूरी अपनाने महत्वपूर्ण है। एर्दोगान ने आगे कहा कि, “सभी आतंकवादी संगठनों को ना सिर्फ सीरिया से बल्कि सीरिया के आस-पास के इलाकों से भी हटाना बेहद ज़रूरी है।

एर्दोगान ने कहा कि, आतंकवादियों का सफाया तुर्की से भी करना बेहद ज़रूरी है। एर्दोगान ने कहा कि हमारा मकसद उन सभी देशों से आतंकवाद को खत्म करना है।

पीकेके से जुड़े पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) आतंकवादी और दाईश एक ही उद्देश्य की सेवा करते हैं और अपने विरोधी देशों की शांति में खलल डालने की कोशिश करते आयें है।

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहनी ने कहा कि उनके का देश मानना ​​है कि सीरिया के संकट में कोई सैन्य समाधान नहीं है, और यह कहते हुए कि सीरिया की आजादी की सुरक्षा तेहरान के लिए एक प्राथमिकता है।

दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि सीरिया में मानवतावादी सहायता के मुद्दे को राजनीतिकरण से बचाने के लिए सीरिया के विकास पर ध्यान केन्द्रित करना होगा।

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