एलजीपी ने गन्ना का समर्थन मूल्य इस साल नहीं बढ़ाने के लिए यूपी सरकार की आलोचना की

एलजीपी ने गन्ना का समर्थन मूल्य इस साल नहीं बढ़ाने के लिए यूपी सरकार की आलोचना की

लखनऊ: लोक गठबंधन पार्टी (एलजीपी) ने आज कहा कि यूपी सरकार के आगामी गन्ना क्रशिंग सीजन के लिए गन्ना उत्पादकों के लिए राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) नहीं बढ़ाने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि गन्ना की इनपुट लागत बढ़ी है । एलजीपी ने राज्य सरकार के इस तर्क को ,कि सामान्य किस्म के लिए 315 रुपये प्रति क्विंटल की पिछले साल की कीमत बरकरार रखकर आगे किसानों के बकाया जमा नहीं होगा, निरर्थक बताया।

पार्टी के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि यूपी में किसानों को गन्ना की देनदारी अभी भी 6000 करोड़ रुपये है जो अगले सीजन के शुरू होने के साथ और भी बढ़ेगा। इसके कारण पश्चिमी यूपी के किसानों के बीच पहले से ही नाराजगी पैदा हो रही है, यह बताते हुए प्रवक्ता ने कहा कि समय पर सुधारात्मक उपाय नहीं किए जाने पर स्थिति और ख़राब हो जाएगी।

प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने वादा किया था कि वह गन्ना की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करेगा लेकिन ऐसा कर पाने में भाजपा सरकार पूर्णतया विफल रही जिसके चलते कैराना लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार हुई। प्रवक्ता ने इस प्रकार कहा कि बीजेपी सरकार को गन्ने की त्वरित डिलीवरी और बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। एलजीपी ने कहा कि एनडीए सरकार ने भी इस संबंध में अब तक कोई सुधारात्मक उपाय नहीं किया है।

प्रवक्ता ने कहा कि मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुर और बुलंदशहर जिलों सहित राज्य के पश्चिमी हिस्सों में स्थिति गंभीर है।

प्रवक्तानेकहाकिबढ़तेबकायाक्षेत्रोंसेप्रभावितअन्यगन्नाउगानेवालेक्षेत्रलखीमपुरखेरी, हरदोई, सीतापुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, अमरोहा, संभल, रामपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, और कासगंज हैं, और कहा कि किसानों के बीच नाराजगी उनकी समस्याओं को हल करने में यूपी सरकार की विफलता के कारण ही है।

प्रवक्ता ने कहा कि चीनी मिलों द्वारा सामना किए जाने वाले संकट को भी तुरंत हल किया जाना चाहिए ताकि समग्र रूप से  समस्या का समाधान किया जा सके। प्रवक्ता ने कहा कि मिलों ने 25अक्टूबर के आसपास परिचालन शुरू कर दिया है और इसी के साथ उत्तर प्रदेश में चीनी की पूर्व फैक्ट्री कीमत 36-37 रुपये प्रति किलो से 30-31 रुपये हो गई है।

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