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एवरेस्ट फतह करने वाली पहली हिंदुस्तानी माज़ूर खातून

नई दिल्ली, 22 मई: एक हिंदुस्तानी खातून ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर परचम लहरा कर तारीख बना डाली है। 25 साला अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली हिंदुस्तानी माज़ूर खातून बन गई हैं।

नई दिल्ली, 22 मई: एक हिंदुस्तानी खातून ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर परचम लहरा कर तारीख बना डाली है। 25 साला अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली हिंदुस्तानी माज़ूर खातून बन गई हैं।

अरुणिमा उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की रहने वाली हैं। नेपाल के सयाहत के वज़ारत के एक आफीसर ने बताया कि टाटा ग्रुप से इको एवरेस्ट एक्सपिडिशन की रुकन अरुणिमा मंगल की सुबह 10.55 बजे दुनिया की सबसे बुलंद चोटी (8,848 मीटर) पर पहुंच गई।

पीर के दिन को अरुणिमा का चार रुकनी टीम कैंप-4 (ऊंचाई- 7900 मीटर) पहुंचा था। यहां से आराम करने के बाद उन्होंने आगे की चढ़ाई शुरू कर दी थी।

31 मार्च को चार रूकनी पार्टी में शामिल अरुणिमा ने एवरेस्ट पर चढ़ाई की नकाबिल रसाई सफर शुरू की थी। अरुणिमा का पूरा खानदान इस कामयाबी को लेकर बहुत खुश है।

पिछले साल ही अरुणिमा ने लद्दाख के 6,622 मीटर ऊंचाई वाले माउंट चमशेर कांगड़ी पर चढ़ाई करने में कामयाबी हासिल की थी।

लेकिन उनका टार्गेट तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचना था। एक दिन पहले ही देहरादून की जुड़वां बहनें ताशी और नैन्सी मलिक ने यह कामयाबी हासिल की थी।

मालूम हो कि वॉलीबॉल खिलाड़ी अरूणिमा सिन्हा को दो साल पहले बरेली में चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया था।

अब अरूणिमा चलने के लिए मसनूई ( नकली) टांग का इस्तेमाल करती हैं। एम्स से आर्टीफिशिल पैर लगने के बाद अरुणिमा ने हौसला दिखाते हुए पहले की तरह खेलना शुरू कर दिया था।

इसके बाद अरुणिमा ने पिछले साल उत्तरकाशी में टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन कैंप में बछेंद्री पाल के नेतृत्व में ट्रेनिंग शुरू की थी।

ट्रेनिंग के दौरान अरुणिमा ने हुकुमत ए हिंद के वज़ारत दिफा की ओर से कियाम नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटनेरिंग में आम Mountaineers के बीच रहकर बेसिक कोर्स भी किया।

‘एक वक्त था, जब हर कोई मेरे लिए फिक्रमंद था। मुझे महसूस होने लगा था कि कुछ ऐसा करना होगा, जिससे लोग मेरी तरफ रहम से न देखें। अखबार में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले लोगों के बारे में पढ़कर मैंने अपने भाई और कोच से अपनी खाहिंश जताई। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए हौसला अफ्जाई की।’
-अरुणिमा सिन्हा

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