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ऑप्रेशन ना किया जाता तो यमन ईरान का हिस्सा होता – यमनी सदर

यमनी सदर अब्दुर्रब मंसूर हादी ने इस अमर की तसदीक़ की है कि यमन को हूसी बाग़ीयों और माज़ूल सदर सालेह की मिलिशियाओं से आज़ाद करा लिया गया है।

सऊदी रोज़ नामने “उकाज़” के साथ ख़ुसूसी गुफ़्तगु में उन्होंने बावर कराया कि अगर सऊदी अरब के ज़ेरे क़ियादत अरब इत्तिहाद का फ़ौजी ऑप्रेशन “अज़म की आंधी” ना शुरू होता तो यमन ईरान का हिस्सा बन चुका होता और ये सब यमनी मईशत के लिए ईरानी इमदाद के मुक़ाबिल अमल में आता।

यमनी सदर ने हूसीयों के लिए ईरानी असलहा लेकर जाने वाले समुंद्री जहाज़ों के पकड़े जाने का इन्किशाफ़ करते हुए ख़बरदार किया कि ईरान पूरे जज़ीरा अरब को निगलने की कोशिशें कर रहा है।

उन्होंने उस मोबाइल फ़ोन के क़िस्से का भी ज़िक्र किया जो उनका हूसी मुशीर अपने दफ़्तर में भूल गया था और इस के ज़रीए हुकूमत को इन्क़िलाब के मंसूबे की तफ़सीलात का इल्म हुआ।

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