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ओलम्पिक एथलीट्स दीगर अफ़राद के मुक़ाबले में 2.8 साल‌ ज़्यादा ज़िंदा रहते हैं

ओलम्पिक एथलीट्स, जो किसी भी मेडल पोज़ीशन पर पहुंचते हैं, दीगर अफ़राद के मुक़ाबले में 2.8 साल‌ ज़्यादा ज़िंदा रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया की मैलबोर्न यूनीवर्सिटी की टीम की तहक़ीक़ में कहा गया है कि इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आया किसी एथलीट ने

ओलम्पिक एथलीट्स, जो किसी भी मेडल पोज़ीशन पर पहुंचते हैं, दीगर अफ़राद के मुक़ाबले में 2.8 साल‌ ज़्यादा ज़िंदा रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया की मैलबोर्न यूनीवर्सिटी की टीम की तहक़ीक़ में कहा गया है कि इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आया किसी एथलीट ने सोने, चांदी या कांस‌ का तमग़ा जीता, लेकिन एथलीट्स दूसरे अफ़राद के मुक़ाबले में ज़्यादा समय‌ जीते हैं। फिलीप क्लार्क ने कहा कि दिलचस्प बात ये है कि सोने का तमग़ा जीतने वालों में ज़िंदगी की तवालत‌ के एतबार से इज़ाफ़ी फ़ायदे नहीं देखे गए है।

मुहक़्क़िक़ीन ने इस एतबार से गरमाई और सरमाई ओलम्पिक मुक़ाबलों में 1896 से शिरकत करने वाले 15हज़ार 174 एथलीट्स की ज़िंदगीयों का मुताला किया। इस सिलसिले में नौ ममालिक के एथलीट्स का ग्रुप तर्तीब दिया गया था, जिस में अमरीका, जर्मनी, रूस, बर्तानिया, फ़्रांस, इटली, कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं।

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