Sunday , December 17 2017

औरंगाबाद में नयी शुरुआत: खोला गया रोटी बैंक।

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र का औरंगाबाद शहर जो अपने सदियों पुराने इतिहास और अजंता-एल्लोरा की गुफाओं की वजह से दुनिया भर में मश्हूर है में इंसानियत के लिए की गयी एक नयी किस्म की शुरुआत की गयी है जिस से इस शहर का कद और भी ऊंचा हो गया है।

जी हाँ बात खुशी की भी है और दिलों को जोड़ने वाली भी; दरअसल औरंगाबाद में महाराष्ट्र का पहला और देश का दूसरा ‘रोटी बैंक’ खुल गया है। रोटी बैंक अपने आप में एक अनोखा तरीका है प्यार बांटने और सेवा करने का; इस से पहले देश में एक और रोटी बैंक खुल चुका है जोकि उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में है जिसकी शुरुआत 5 दिसंबर को युसूफ मुकाती जोकि हारुन मुकाती इस्लामिक सेंटर के फाउंडर यानी संस्थापक हैं।

अपने इस बैंक को खोलने के पीछे की कहानी बयां करते हुए मुकाती ने एक इंटरव्यू में बताया: “मैंने सालों तक लोगों को भूखे भटकते और तड़पते देखा है, जिनमे काफी बड़ी तादाद मुस्लिम परिवारों की है। कुछ परिवार तो ऐसे भी हैं जिनको पूरे दिन में एक रोटी भी खाने को नसीब नहीं होती, और इन लोगों में इतनी आत्मसम्मान है की यह भीख नहीं मांगते। बड़े परिवारों में तो यह परेशानी और भी ज़्यादा थी क्यूंकि वहां कमाने वाला सिर्फ एक इंसान होता है और खाने वाले ज़्यादा। इसी बात को लेकर मैंने सोचा; अपनी पत्नी और बहनों से बात की और हमने यह बैंक शुरू कर दिया। शुरुआत में हमारे पास 250 लोग थे जो खाना जमा करवाते थे अब उनकी तादात लगातार बढ़ रही है

रोटी बैंक के काम करने का तरीका बिल्कुल सीधा है। कोई भी इस बैंक का मेंबर बन सकता है और उसे दिन में खाने के लिए २ ताज़ी रोटियां और थोड़ी सब्ज़ी जमा करवानी पड़ेगी जिसको गरीबों में बांटा जा सके। कोई चाहे तो इस से ज़्यादा रोटी भी जमा करवा सकता है।
बैंक के हरेक मेंबर को एक कोड लगा बैग दिया जाता है जिसमे खाना लाना होता है। खाना गरीबों को परोसने से पहले इसे बैंक के लोग चेक करते हैं और तसल्ली होने पर ही खाना लिया और परोसा जाता है।

बैंक का एक कायदा है की यह बैंक भिखारियों को खाना नहीं देता। बाकी सभी के लिए बैंक सुबह 11 बजे से रात के 11 बजे तक खुला रहता है। कोई भी इस दौरान आकर खाना ले सकता है।

बैंक में वेज और नॉन-वेज दोनों तरह के खाने को अलग अलग फ़्रीज़रों में जमा किया जाता है। बैंक बड़े बड़े होटलों, रेस्टॉरंटों और कैंटीनों को भी गुज़ारिश करता है की वो अपना बचा खाना फेंकें नहीं इस बैंक में दें ताकि यह किसी के काम आ सके।

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