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और अब अन्ना हज़ारे पतंगों के साथ आसमानों में

जयपुर, १४ जनवरी (पी टी आई) गुलाबी शहर के आसमानों पर संक्रांति के तहवार के रोज़ पतंगों के झुरमुट नज़र आ रहे हैं लेकिन इस में हैरत अंगेज़ बात ये है कि ऐसी पतंगों की कसरत है जिन पर अन्ना हज़ारे की तसावीर मौजूद हैं।

जयपुर, १४ जनवरी (पी टी आई) गुलाबी शहर के आसमानों पर संक्रांति के तहवार के रोज़ पतंगों के झुरमुट नज़र आ रहे हैं लेकिन इस में हैरत अंगेज़ बात ये है कि ऐसी पतंगों की कसरत है जिन पर अन्ना हज़ारे की तसावीर मौजूद हैं।

याद रहे कि हालिया दिनों में अन्ना हज़ारे को जो मुल़्क गीर शौहरत हासिल हुई है, इस का असर तिजारती हलक़ों पर भी मुरत्तिब हुआ। अना हज़ारे के नाम से टोपियां बनाने वालों की भी चांदी हो गई थी औरा बाना हज़ारे पतंगों के साथ आसमान में लहरा रहे हैं। हर साइज़ की पतंग पर अन्ना हज़ारे की तसावीर मौजूद हैं।

यहां के मशहूर मार्किट हल्दियों का रास्ता में एक क़दीम पतंग साज़ अबदुल हमीद ने बताया कि आम तौर पर पतंग उड़ाने के शौक़ीन हज़रात रंग बिरंगी और फ़िल्म अदाकारों की तसावीर वाली पतंगें खरीदते हैं लेकिन जारीया साल हम ने महसूस किया कि लोग फैंसी पतंगों को ख़रीद ज़रूर रहे हैं लेकिन अन्ना हज़ारे की तसावीर वाली पतंगों को तर्जीह दे रहे हैं लिहाज़ा पतंग साज़ भी अब अन्ना हज़ारे की तसावीर वाली पतंगें ज़्यादा तादाद में तैयार कर रहे हैं जिस से अन्ना हज़ारे की मक़बूलियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

याद रहे कि मकर संक्रांति हिंदूओं का एक अहम त्यॊहार है जिसे पतंग उड़ाने के दिन के तौर पर भी मनाया जाता है। क्या बच्ची, क्या जवान और क्या बूढ़ी, सब के सब अपने मकानात की छतों पर पहुंच कर पतंग, धागा, मांझा और चर्ख़ी के साथ नज़र आते हैं। अबदुल हमीद ने मज़ीद कहा कि फैंसी पतंगें प्लास्टिक से तैयार की जाती हैं जिन पर फ़िल्म स्टार्स की तसावीर हुआ करती थीं लेकिन जारीया सालाना हज़ारे ने सब को मात दे दी। फैंसी पतंगों की क़ीमत 10 रुपय से शुरू होती है।

उन्होंने कहा कि कुछ ग्राहकों ने ख़ुसूसी तौर पर अन्ना हज़ारे की तसावीर वाली पतंगों को आर्डर दे कर तैयार करवाया है। हालाँकि गुज़श्ता साल के मुक़ाबले पतंगों और मांझे की क़ीमतों में इज़ाफ़ा हुआ है लेकिन इस के बावजूद ख़रीदारों के जोश-ओ-ख़ुरोश में कोई कमी नहीं आई है और हमें भी अच्छे कारोबार की तवक़्क़ो है क्योंकि शदीद सर्दी और तहवार की वजह से स्कूलस भी बंद हैं।

पतंग का कारोबार करने वाले एक और ताजिर मुहम्मद उसमान ने बताया कि यूपी के शहर बरेली में बनाए गए मांझे और पतंगों की तलब बहुत ज़्यादा है लेकिन जारीया साल मांझे की सरबराही में क़िल्लत पैदा हो गई है।

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