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कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक नहीं तो भारत में इसे हटाना ग़लत कैसे: रवि शंकर

नई दिल्ली: देश भर में तीन तलाक पर छिड़े बहस के दरमियान एक साथ तीन तलाक के मुद्दे पर केंद्र का बचाव करते हुए कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शुक्रवार (14 अक्टूबर) को कहा कि जब एक दर्जन से अधिक इस्लामी देश कानून बनाकर इस चलन को समाप्त कर सकते हैं, तो भारत जैसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ देश के लिए इसे किस प्रकार गलत माना जा सकता है. उनकी टिप्पणी इस चलन पर उच्चतम न्यायालय में केंद्र के हलफनामा का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा विरोध किए जाने के एक दिन बाद आया है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की चर्चा का भी बहिष्कार किया है.

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आप को बता दें कि मुसलमानों में कई फिरके हैं जो इस मुद्दे पर अलग-अलग मान्यताएं रखते हैं,लेकिन भारत में ट्रिपल तलाक को मानने वालों की संख्याँ अधिक है.
भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार सात अक्तूबर को केंद्र ने मुस्लिमों में बहुविवाह, निकाह हलाला और एक साथ तीन तलाक के चलन का उच्चतम न्यायालय में विरोध किया था.

जनसत्ता के ख़बरों के अनुसार,प्रसाद ने यहां संवाददाताओं से कहा कि , ‘पाकिस्तान, ट्यूनीशिया, मोरक्को, ईरान और मिस्र जैसे एक दर्जन से ज्यादा इस्लामी देशों ने एक साथ तीन तलाक के पर्था को समाप्त किया है. अगर इस्लामी देश कानून बनाकर इस चलन का खात्मा कर सकते हैं, और इसे शरिया के खिलाफ नहीं मना जाता है, तो यह भारत में कैसे गलत हो सकता है, जो धर्मनिरपेक्ष देश है.’ मंत्री ने हालांकि समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि विधि आयोग इस पर विचार कर रहा है और उसने समाज के विभिन्न तबकों से राय मांगी है. उन्होंने कहा कि चूंकि यह उनके विचाराधीन है, इसलिए उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है.

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