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दर्जनों लड़कियों ने शादियां रुकवाई कहा, हमें नहीं बनना बालिका वधू

रांची : झारखंड पिछले साल तक बाल विवाह के मामले में मुल्क़ में पहले मुक़ाम पर था। बाल विवाह करने वाली 55 फीसदी लड़कियां यहीं की होती थीं। यूनिसेफ केे मुताबिक़ रियासत की करीब 20 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो जाती थी। लेकिन 2015 में गुमला के घाघरा की सरस्वती, व पालकोट की बिरसमुनी की जिद ने तस्वीर बदल दी है। इन लड़कियों ने बाल विवाह करने से इनकार कर दिया और अपने ही परिजनों के खिलाफ थाने पहुंच गईं। दोनों ने कहा-अभी पढ़ाई करनी है शादी नहीं। इनका मुखालिफत काम आया और बेदारी फैली। पिछले 6 माह में ही सिमडेगा, लोहरदगा, गिरीडीह, देवघर के गांवों में दो दर्जन से ज्यादा लड़िकयां बाल विवाह के खिलाफ खड़ी हो गईं।

14 वर्षीय ममता 9वीं में पढ़ रही थी। परिवार ने 5 फरवरी 2016 को शादी तय कर दी। इसे रोकने के लिए ममता विधिक जागरूकता शिविर पहुंच गई। लगन पान व मेंहदी रस्म शुरू हो चुकी थी। पुलिस ने शादी रुकवाई।

सिमडेगा के कुलुकेरा गांव की 15 साल की सकीना 8वीं में पढ़ रही है। 22 अप्रैल को बारात आने वाली थी। सकीना ने अपने टीचरों के जरिए थाने तक बात पहुंचाई, तब जाकर शादी रुक पाई।

रामगढ़ के कुजू की रहने वाली 17 साल की खुशबू की शादी 20 अप्रैल को होनी थी। वो पढ़ना चाहती थी। परिजन नहीं माने तो बड़ी बहन संगीता ने साथ दिया। संगीता ने पिता, बड़े भाई और बहनोई के खिलाफ केस किया

झारखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉक्टर मनोज कुमार ने बताया कि हमारे पास लगातार शादी रुकवाने के फोन आते हैं। ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह कम हो रहे हैं।

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