Monday , July 23 2018

कठुआ रेप-मर्डर केस – एक पिता का दर्द: ‘वह बेचारी कुछ नहीं जानती थी…क्या हिंदू, क्या मुस्लिम?’

जैसा कि उनकी आठ साल की बेटी असीफ़ा का क्रूर बलात्कार और हत्याकांड जम्मू और कश्मीर में एक राजनीतिक उपकरण बन गया है, बखेरवाल खानाबदोश और उनके परिवार ने चुपचाप अपना बैग पैक किया और अपने पशुओं के साथ 600 किलोमीटर की यात्रा पर पहाड़ियों में निकल गये, जैसे वे हर गर्मी करते हैं।

शुक्रवार को एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे मेरी बेटी हर दिन याद आती है! मेरी बेटी की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए।”

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, 35 वर्षीय रोते हुए कहते हैं, “अगर उन्हें बदला लेना था, तो वे किसी और को पकड़ सकते थे। वह एक निर्दोष बच्ची थी। उसे अपने हाथ और पाँव में पता नहीं था, कि मेरा दायाँ हाथ कौन सा है और बायाँ हाथ कौन सा है। कभी उसने यह नहीं समझा कि हिन्दू क्या होता है और मुसलमान क्या होता है!”

वह उनके तीनों बच्चों में सबसे छोटी थी। लड़के कक्षा 11 और 6 में हैं, और कठुआ में फैमिली टाइम के दौरान, पड़ोसी गांवों में स्कूल जाते थे।

इस गर्मी में, उसकी मां ने जोर देकर कहा था कि उसे आठ साल की उम्र में “निजी अकादमी” में भर्ती करवा देंगे। “हमने यह नहीं सोचा था कि हम अपनी बच्ची को डॉक्टर बनाएंगे, टीचर बनाएंगे। हमने इतनी बड़ी सोच नहीं रखी थी! हमने तो यह सोचा था कि पढ़ लिख जाएगी तो अपने को देख लेगी, अपना वक़्त गुज़ार लेगी, रहने का तरीका आ जाएगा! ख़ूबसूरत थी, किसी अच्छे घर में चली जाएगी। हमने कभी नहीं सोचा था कि हम उसे ऐसे जानवरों की वजह से खो देंगे।”

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य सरकार नाबालिगों पर बलात्कार करने वालों के लिए मौत की सजा अनिवार्य बनाने के लिए एक नया कानून लाएगी।

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