Thursday , April 26 2018

कनाडाई प्रधानमंत्री भारत के साथ आस्था और एकता की पुष्टि करने के लिए कल से भारत की यात्रा पर

नई दिल्ली : कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्राउडू 17 फरवरी से शुरू होने वाले देश की सप्ताहांत यात्रा के दौरान सार्वजनिक टिप्पणी के दौरान भारत की एकता और अखंडता में अपनी सरकार की आस्था की पुष्टि करने की संभावना है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुडो आतंकवाद का मुकाबला, ऊर्जा तथा व्यापार आदि जैसे मुख्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए अगले महीने सात दिन के दौरे पर यहां आ रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री ट्रूडो ने ऐलान किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यौते पर 17-23 फरवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर होंगे. कनाडा उच्चायोग के मुताबिक अपनी सात दिनी भारत यात्रा में ट्रूडो नई दिल्ली के अलावा आगरा, मुंबई, अमृतसर और अहमदाबाद भी जाएंगे. भारत दौरे के दौरान कनाडाई प्रधानमंत्री ताजमहल, जामा मस्जिद और स्वर्ण मंदिर भी जाएंगे.

भारत और कनाडा के बीच लोगों से लोगों की नातेदारी के साथ ही मजबूत कारोबारी रिश्ते भी हैं. बीते तीन सालों के दौरान भारत में कनाडा का निवेश बढ़कर 15 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है. कनाडा भारतीय छात्रों के लिए भी एक आकर्षक स्थान है. साल 2017 में करीब सवा लाख भारतीय छात्र स्टूडेंट परमिट पर कनाडा में थे.

हालांकि, संबंधों की मिठास के बीच ही कनाडा में खालिस्तान समर्थकों को मिल रही मदद और पनाह को लेकर भारत की चिंताएं हैं. भारत की कोशिश होगी कि इस मामले पर कनाडा सरकार से उसे शीर्ष स्तर से कार्रवाई का कोई आश्वासन हासिल हो सके. अक्सर कनाडा में अलगाववादी तत्वों के लिए बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है।

हालांकि कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्राउडू सीधे खलिस्तान आंदोलन को संदर्भित करने की संभावना नहीं रखते हैं, उनका बयान इस मुद्दे को रेखांकित करना होगा कि ओटावा में इसके लिए कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं है।

असल में, जस्टिन ट्राउडू को अपने पूर्ववर्ती स्टीफन हार्पर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वैंकूवर में डिनर रिसेप्शन में पहली बार एक स्थिति का दोहराया जाने की उम्मीद है

उल्लेखनीय, है कि कनाडा भारत के सबसे बड़े यूरेनियम आपूर्तिकर्ताओं में से है तथा दोनों देशों के बीच परमाणु तालमेल संधि भी है. प्रधानमंत्री मोदी ने अप्रैल 2015 में कनाडा का द्विपक्षीय दौरा किया था. नवंबर 2012 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के बाद अब तक वहां के किसी प्रधानमंत्री ने भारत का दौरा नहीं किया है.

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