करज़ई के सख़्त मौक़िफ़ पर अमरीका – अफ़्ग़ान मुआमलत पर दस्तख़त ना हो सकी

करज़ई के सख़्त मौक़िफ़ पर अमरीका – अफ़्ग़ान मुआमलत पर दस्तख़त ना हो सकी
अफ़्ग़ानिस्तान में अलक़ायदा से लड़ने के लिए बाअज़ अमरीकी अफ़्वाज को बरक़रार रखने की इजाज़त से मुताल्लिक़ सेक्योरिटी मुआमलत आज बिखरने के दहाने तक पहूंच गई क्युंकि सदर हामिद करज़ई ने कहा कि वो मुज़ाकरात से दस्तबरदार हो जाने का इरादा रखत

अफ़्ग़ानिस्तान में अलक़ायदा से लड़ने के लिए बाअज़ अमरीकी अफ़्वाज को बरक़रार रखने की इजाज़त से मुताल्लिक़ सेक्योरिटी मुआमलत आज बिखरने के दहाने तक पहूंच गई क्युंकि सदर हामिद करज़ई ने कहा कि वो मुज़ाकरात से दस्तबरदार हो जाने का इरादा रखते हैं।

अमरीका की कोशिश है कि बाहमी सलामती मुआहिदा पर जारीया माह के ख़त्म तक दस्तख़त हो जाए ताकि अमरीका ज़ेरे क़ियादत नैटो फ़ौजी इत्तिहाद आइन्दा साल के इख़तेताम तक 87,000 लड़ाका अफ़्वाज की वापसी का प्रोग्राम तय कर सके।

लेकिन करज़ई ने कहा कि वो इस मुआमलत पर दस्तख़त में जल्दबाज़ी से काम नहीं लेंगे और पहले रिवायती जिर्गा की मंज़ूरी हासिल करना चाहेंगे जिस का इजलास एक माह में मुनाक़िद शुदनी है।

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