Wednesday , December 13 2017

करिश्माती तौर पर बच जाने वाली नोमोलूद की मौत

ग़ज़ा के डॉक्टर्स ने गुज़िशता हफ़्ते एक मुतवफ़्फ़ी हामिला ख़ातून के पेट से नोमोलूद को ज़िंदा बचा लिया था लेकिन बर्क़ी कटौती और दीगर पेचीदगीयों की वजह से वो आज जांबर ना होसकी।

ग़ज़ा के डॉक्टर्स ने गुज़िशता हफ़्ते एक मुतवफ़्फ़ी हामिला ख़ातून के पेट से नोमोलूद को ज़िंदा बचा लिया था लेकिन बर्क़ी कटौती और दीगर पेचीदगीयों की वजह से वो आज जांबर ना होसकी।

वसती ग़ज़ा में वाक़्य देर अलबाला हॉस्पिटल में उस 6 दिन की लड़की को बचाने की काफ़ी कोशिश की। उस लड़की की 23 साला माँ जो 8 माह की हामिला थी ,अपने मकान में इसराईली बमबारी की ज़द में आकर जांबाहक़ होगई थी। इस ख़ातून की कोख से नोमोलूद को ज़िंदा बचा लिया गया और वो गुज़िशता छः दिन से मौत-ओ-ज़ीस्त की कश्मकश में मुबतला थी। हॉस्पिटल में बर्क़ी कटौती और अदवियात की कमी उस की मौत का सबब बनी।

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