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कर्नाटक के अलग झंडे की मांग को केन्द्र ने किया खारिज, कहा- ‘संविधान में प्रावधान नहीं’

नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार की राज्य के लिए अलग झंडे की मांग को मंगलवार को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्र का कहना है कि संविधान में किसी भी राज्य के लिए अलग झंडे का कोई प्रावधान नहीं है।

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने राज्य के लिए एक अलग ‘झंडा’ तैयार करने की मांग की है। इसके लिए नौ सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया है और इसे कानूनी तौर पर मान्यता देने के लिए एक रिपोर्ट भी जमा की गई, लेकिन केंद्र ने इसे गैर संवैधानिक करार दिया है।

वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी इस पहल का खुलकर बचाव किया। उन्होनें कहा कि कर्नाटक के आधिकारिक झंडे की मांग असंवैधानिक नहीं है।

अपने कदम का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कि क्या संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है जो राज्य को अपना अलग झंडा रखने से रोके? क्या आपने संविधान में ऐसा कोई प्रावधान देखा है? क्या बीजेपी के लोगों को ऐसे किसी प्रावधान के बारे में पता है? तो वे यह मुद्दा क्यों उठा रहे हैं?’

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान में ‘एक देश एक झंडा’ के सिद्धांत के आधार पर स्पष्ट किया कि तिरंगा ही पूरे देश का ध्वज है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि हम एक देश हैं और हमारा एक झंडा है।

ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो राज्यों के लिए अलग झंडे की अनुमति देता हो या ऐसा करने को प्रतिबंधित करता हो।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्नाटक का अपना एक झंडा है जो जनता का प्रतिनिधित्व करता है सरकार का नहीं। राज्य में तमाम बड़े जनआयोजनों में इस झंडे का इस्तेमाल किया जाता है।

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