Wednesday , September 19 2018

कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच गला काट रणनीति

कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी बीजेपी के बीच गला काट लड़ाई देखने को मिल रही है. राज्य के चुनावी समर में सीएम आवास के बगल में स्थित सरकारी गेस्टहाउस असल अखाड़ा बना हुआ है. दिल्ली से आने वाला हर बड़ा नेता यहीं ठहरता है. दोनों ही पार्टियों के रणनीतिकार इसी गेस्टहाउस से शह-मात की रणनीति तय कर रहे हैं.

यहां लड़ाई तो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दिख रही है, लेकिन कई ‘बैकरूम ब्यॉज़’ भी इस लड़ाई में अपने दांव-पेंच दिखा रहे हैं. कांग्रेस महासचिव और केरल के सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसी गेस्टहाउस में अपना वॉर रूम बनाया है, जहां बातों और मुलाकातों के जरिये चुनावी रणनीति तय हो रही है. कांग्रेस महासचिव ने वेणुगोपाल की मदद के चार सचिव दिए हैं, जो कि दक्षिण के चारों राज्यों से हैं.

इनमें तेलंगाना से कांग्रेस की पूर्व सांसद मधु याक्षी गौड़ को बेंगलुरु डिविजन, आंध्र प्रदेश के शैलजानाथ को गुलबर्गा डिविजन, तमिलनाडु के माणिकम टैगोर को बेलगाम डिविजन और केरल के विष्णुनधान को मैसूर डिविजन का जिम्मा सौंपा गया है. ये सभी बेंगलुरु आने पर इसी गेस्टहाउस में ठहरते हैं.

कर्नाटक कांग्रेस के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब वेणुगोपाल को एक साल पहले चुनाव की तैयारियों में लगा दिया गया है. गोवा में हुई ‘गड़बड़ी’ और मनचाहों को तरजीह देने के आरोपों के बाद दिग्विजय सिंह को राहुल गांधी ने किनारे करते हुए वेणुगोपाल को कर्नाटक में पार्टी की देखरेख का जिम्मा सौंपा.

दिग्विजय से उलट वेणुगोपाल यहां खुद को पार्टी काडरों और नेताओं से घुल-मिलकर जमीनी हालात का जायजा लेते रहें. उन्होंने सभी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और अपने मातहत काम करने वाले चारों सचिवों से रोजाना अपडेट भी लेते रहे. बेंगलुरु से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, वेणुगोपाल एक सख्त टास्कमास्टर हैं और उन्हें बातों से बेवकूफ बनाना आसान नहीं.

वेणुगोपाल के इस वॉररूम से महज एक किलोमीटर की दूरी पर सीएम सिद्धारमैया भी अपना एक छोटा वॉररूम चला रहे हैं. दिल्ली से आए एक प्रसिद्ध चुनाव विश्लेषक प्रेमचंद पलेटी पिछले एक साल से सिद्धारमैया के साथ हैं और उन्हें जमीनी हालात के बारे में बताते रहते हैं.

चुनाव सर्वे एजेंसी सी-फोर चलाने वाले पलेटी ने न्यूज़18 से बातचीत में कहा, ‘अभी तो कांग्रेस की स्थिति काफी अच्छी है. सत्ताधारी पार्टी एक बार फिर सरकार बनाने में कामयाब रहेगी. हमारे पास पूरा डेटा है और कोई भी इसे देख सकता है.’ उनका दावा है कि 2013 के चुनाव में भी सिद्धारमैया के लिए किया गया उनका विश्लेषण बिल्कुल सटीक बैठा था.

वहीं मोदी सरकार के दो मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और पीयूष गोयल भी राज्य में बीजेपी के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं. बीजेपी के राज्य प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव को यहां तीसरे पायदान पर खिसका दिया गया है और ज्यादातर फैसले जावड़ेकर और गोयल ही ले रहे हैं. इनके अलावा गुजरात के चुनावों में मोदी और शाह की शान बचाए रखने वाले भूपेंद्र यादव को भी जल्द ही कर्नाटक भेजा जा सकता है.

बीजेपी की तरफ से इन नेताओं के अलावा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी अपना एक अलग इलेक्शन वॉर रूम चला रहे हैं. वहीं बीजेपी के सोशल मीडिया सेल ने भी बेंगलुरु में काम करना शुरू कर दिया है. बीजेपी से जुड़े एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, राज्य में बीजेपी वित्तीय संकट से भी जूझ रही है और राज्य के ज्यादातर नेता यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि चुनाव के सारे खर्चे येदियुरप्पा अपनी जेब से करें. कर्नाटक बीजेपी के इस नेता के मुताबिक, हालात की नजाकत को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व अब मदद को आगे आया है.

हालांकि इन सारी कोशिशों के बाद यही देखना होगा कि वोटर आने वाले चुनाव में किसकी नीतियों-रणनीतियों पर मुहर लगाएंगे.

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