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कर्नाटक को मिला पहला मानव दूध बैंक, ज़रुरतमंद शिशुओं को दूध प्रदान करेगा ‘अमारा’

कर्नाटक के बेंगलुरु को मंगलवार 10 अक्टूबर को ‘अमारा’ के उद्घाटन के साथ अपना पहला मानव दूध बैंक मिला। अमारा ब्रैस्ट मिल्क फाउंडेशन ने अपना पहला मानव दूध बैंक एक साल पहले नई दिल्ली में फोर्टिस ला फेम, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र के बच्चों के फंड (यूनिसेफ) की भागीदारी के साथ लॉन्च किया था। भारत में यह दूसरा मानव दूध बैंक है।

बेंगलुरु में अमारा मिल्क बैंक डोनर माताओं और नवजात शिशुओं के दूध की ज़रूरत के लिए मंगलवार से उपलब्द हो गया है। यह उन माताओं के लिए वरदान होगा जो दूध उत्पादन की कमी के कारण अपने बच्चे को स्तनपान नहीं कर सकती।

फोर्टिस हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए फोर्टिस इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर अनीका पराशर ने अमारा के सह-संस्थापक डॉ. रघुराम मल्लिया और डॉ. अंकित श्रीवास्तव को स्तन दूध बैंक के विचार की शुरुआत करने का धन्यवाद किया।

डॉ. रघुराम ने आश्वासन दिया कि दाता के घर से एकत्र किए गए दूध को बाद में गुणवत्ता की जांच करने और संसाधित करने से पहले नवजात शिशुओं को खाने से पहले जांच की जाएगी। अमारा केंद्र सख्ती से जमा करने और दाता के दूध सुरक्षित रखने में यूरोपीय मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करता है।

डॉ. रघुराम ने कहा, “18 महीनों में, हमारे पास 90 से ज्यादा दाता माताओं और 700 लीटर दूध पहले ही संसाधित हो चुके हैं और 350 से अधिक बच्चों को सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रदान किया गया है।”

ला फमेम के निदेशक प्रथिमा रेड्डी ने कहा, “यह पहल केवल समय से पहले के बच्चों और माता की सहायता करने के लिए है, जो अपने बच्चे को नहीं खिला सकें, इस में कोई पैसा नहीं है।”

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