Thursday , July 19 2018

कर्नाटक में बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए RSS ने चलाया था ‘थर्ड पार्टी कैंपेन’?

कर्नाटक में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने शुरू हो गए हैं और शुरूआती रूझानों में बीजेपी तेजी से बहुमत की तरफ बढ़ रही है। हालांकि रूझानों में सीटों की संख्या का घटना-बढ़ना लगातार जारी है। वहीं अब चर्चाएं ये शुरू हो गई हैं कि अगर कर्नाटक में भाजपा सरकार बना लेती है तो फिर जीत का सेहरा किस-किस के सिर पर सजेगा?

वैसे तो दक्षिण भारत में भाजपा की इस जीत के लिए सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया जाएगा, लेकिन इनके अलावा भी कई और संगठन और नेता ऐसे हैं जिन्हें कर्नाटक में जीत का श्रेय दिया जाएगा।

इनमें से एक बीजेपी का सहयोगी संगठन आरएसएस, जी हां, कर्नाटक में भाजपा की लहर लाने के लिए संघ की भूमिका अहम रही है। संघ के कार्यकर्ताओं और कई बड़े पदाधिकारियों ने एक साल पहले से ही बीजेपी के लिए राज्य में सियासी जमीन तैयार करने के लिए मेहनत शुरू कर दी थी। बीजेपी ने कर्नाटक का चुनाव हिंदुत्व के एजेंडे पर लड़ा था और इसके लिए संघ ने भाजपा की खूब मदद की थी।

भले ही संघ के किसी कार्यकर्ता या पदाधिकारियों ने सामने से आकर बीजेपी के लिए प्रचार नहीं किया, लेकिन पूरे कर्नाटक में थर्ड पार्टी कैंपेन जरूर चलाया। पूरे चुनावों के दौरान संघ की भूमिका बेहद ही अहम रही। संघ के स्वयंसेवकों ने चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के पक्ष में नारे तो नहीं लगाये, मगर पूरे कर्नाटक में थर्ड पार्टी कैम्पेन चलाया, मकसद रहा मतदान को बढ़ाना। जाहिर है कि बीजेपी को इसका फायदा जरूर मिला और अगर राज्य में बीजेपी की सरकार बन जाती है तो पर्दे के पीछे संघ की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

दक्षिण भारत के कर्नाटक में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक विराट संगठन के तौर पर स्थापित है। संघ नजरिये से उत्तर और दक्षिण प्रांतों में बंटे कर्नाटक में तकरीबन 5 हजार शाखाएं चलती हैं। संघ दृष्टि से जिलों की संख्या 41 है।

मिलन और साप्ताहिक कार्यक्रमों की संख्या भी अच्छी है। शाखाओं के ट्रैंड से ऐसा लग रहा है कि युवा स्वयंसेवकों में संघ के प्रति रुझान बढ़ा है। लिहाजा, वैचारिक सियासी संगठन बीजेपी को मदद देने के लिये संघ के स्वयंसेवक आगे आये हैं। लिहाजा, संपूर्ण कर्नाटक में चुनावों के दरमियान चलाया गया ‘थर्ड पार्टी कैम्पेन’।

दक्षिण भारत में प्रभाव बनाने के लिये बीजेपी का कर्नाटक में सत्ता में आना जरुरी है। इसके बाद ही वह केरल और तमिलनाडू तक पैर पसार सकती है।

कर्नाटक में 85 फीसदी आबादी हिन्दू है। यहीं कारण है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यहां सांस्कृतिक के साथ ही सियासी तौर पर भी मजबूत होना चाहता है। शायद इसलिए यह कहा जा सकता है कि संघ की सोच के मुताबिक बीजेपी ने कर्नाटक में एक भी मुस्लिम को पार्टी का उम्मीदवार नहीं बनाया।

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