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कर्नाटक: मोदी के खास रहे हैं गवर्नर वजुभाई, नरेंद्र मोदी के लिए खुद की सीट भी छोड़ दी थी

कर्नाटक में सरकार बनाने के इंतजार में बैठी भारतीय जनता पार्टी बीजेपी और कांग्रेस+जनता दल (सेक्युलर) राज्यपाल वजुभाई के फैसले का इंतजार कर रही हैं। दरअसल, राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजे कुछ ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अकेले सरकार बना पाने की स्थिति में नहीं है। दावा दोनों पक्षों की ओर से किया गया है, ऐसे में फैसला अब राज्यपाल को अपने विवेक के आधार पर लेना है।

राज्यपाल वजुभाई आर. वाला (79) के बारे में जानने की कोशिश करें तो पता चलता है कि वह नरेंद्र मोदी के सबसे वफादार लोगों में से एक रहे हैं। गुजरात सरकार में वित्त मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे वजुभाई ने नरेंद्र मोदी को विधानसभा पहुंचाने के लिए खुद की सीट भी छोड़ दी थी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपनी ‘वफादारी’ साबित करते हैं या फिर दूसरे पक्ष को मौका देते हैं।

2014 में कर्नाटक का राज्यपाल बनने से पहले वजुभाई लगातार 7 चुनाव जीत चुके थे और रेकॉर्ड 18 बार गुजरात सरकार का बजट पेश किया था। आरएसएस के साथ 57 वर्षों तक जुड़े रहने वाले वजुभाई जनसंघ के संस्थापकों में से एक हैं। इमर्जेंसी के दौरान वह 11 महीने तक जेल में रहे।

अब देखना दिलचस्प होगा कि वजुभाई यहां कैसा निर्णय लेते हैं। कर्नाटक की 224 सीटों में 222 के नतीजे घोषित हो गए हैं और बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78, जेडीएस गठबंधन को 38 और अन्य को दो सीटें मिली हैं। ऐसे में कोई भी पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 112 को नहीं छू सकी है। हालांकि, कांग्रेस ने जेडीएस के कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री प्रॉजेक्ट करके सरकार बनाने का प्रबल दावा पेश किया है।

दूसरी तरफ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी ने भी बहुमत से आठ सीटें कम पाने के बावजूद सरकार बनाने का दावा पेश किया है। ऐसे में राज्यपाल के सामने भी अच्छी-खासी चुनौती उत्पन्न हो गई है।

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