Tuesday , December 12 2017

कर्फ्यू प्रभावित श्रीनगर के अस्पतालों में सैकड़ों स्वयंसेवक दुखी मानवता की सेवा में व्यस्त

श्रीनगर। कश्मीर घाटी में जहां 8 जुलाई हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वाणी की हत्या के बाद भड़क उठने वाली विरोध लहर अभी थमने का नाम ही नहीं ले रही है और पिछले 13 दिनों के दौरान 46 लोग मारे गए करीब 4 हजार अन्य घायल हो गए हैं, वहीं गैर सरकारी संगठनें (एनजीओ) और सामाजिक व धार्मिक संगठनों से जुड़े सैकड़ों स्वयंसेवक गरमाई राजधानी श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहे घायल, चिकित्सा के लिए लाए जाने वाले नए घायलों और कर्फ्यू के कारण अस्पतालों में फंसे मरीजों और उनके तीमारदारों की चौबीसों घंटे सेवा में लगे हुए हैं। इन एनजीओ और सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने श्रीनगर के लगभग सभी अस्पतालों के छेत्र में सामुदायिक रसोई और चिकित्सा शिविर स्थापित किए हैं जिनमें घायलों और तीमार अधिकारियों की चौबीसों घंटे सेवा अंजाम दी जा रही है। श्रीनगर के सभी सरकारी अस्पतालों सहित एस एम एच एस (सदर अस्पताल), हड्डियों और जोड़ों के अस्पताल, जीबी पंत चील्डरन अस्पताल, शेर कश्मीर संस्थान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के परिसर में मुफ्त भोजन और मेडिकल कैंपों के कारण तंग पड़ गए हैं जिनकी बदौलत हजारों बीमारों (विशेष रूप से घायलों) और उनके तीमारदारों को राहत मिल रही है।

यह स्वयंसेवक न केवल बीमारों और तीमारदारों को मुफ्त भोजन और दवायें प्रदान कर रहे हैं बल्कि अस्पताल प्रशासन मरीजों के प्रवाह को विनियमित करने और अस्पतालों को साफ रखने में भी आगे रहते हैं। यूएनआई के एक संवाददाता जिसने श्रीनगर के विभिन्न अस्पतालों का दौरा किया, ने एस एम एच एस अस्पताल (सदर अस्पताल) के परिसर में मुफ्त भोजन और दवाओं के कम से कम 15 शिविर लगे हुए देखे। शब्बीर अहमद नामक एक स्वयंसेवी ने बताया ‘मैं अपने दोस्तों के साथ यहाँ (सदर अस्पताल) 9 जुलाई से लगातार आ रहा हूँ। हम हर दिन तड़के यहां पहुंचते हैं और देर रात अपने घरों को वापस चले जाते हैं। हमने यहां अपनी एनजीओ दारालि्ाय के बैनर तले एक फ्री मेडिकल कैंप स्थापित किया है जो हम बीमारों को दवा प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा हमारे स्वयंसेवक केज्वालटी में रोगियों के प्रवाह को विनियमित करने में कर्मचारियों की मदद कर रहे हैं। ‘

दारुल खैर ने अपने एक बयान में कहा, ‘पूरे कश्मीर में लगातार 13 वें दिन भी गंभीर कर्फ्यू, सरकारी बंदिशों और कदगनों के कारण कश्मीर वासी जिन कठिनाइयों और मुसीबतों का सामना कर रहे हैं वे बेहद दर्दनाक और अकथ्य हैं। विशेष रूप से सुरक्षा बलों और पुलिस द्वरा सीधे फायरिंग, टीयर गैस शिलिंग और पैलेट के बेतहाशा इस्तेमाल से अब तक पचास से अधिक निहत्थे नागरिक मारे गए और सैकड़ों गंभीर रूप से घायल लोग विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं। ‘

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